ब्राह्मणों को साधने निकली सपा! 2027 चुनाव के लिए अखिलेश का नया प्लान तैयार
2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है. 17 जून को होने वाली अहम बैठक में संगठनात्मक रणनीति, सम्मेलन की रूपरेखा और राजनीतिक संदेश पर चर्चा होगी.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं. 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी अब ब्राह्मण मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटी है. इसी कड़ी में पार्टी ने 17 जून को लखनऊ स्थित कार्यालय में ब्राह्मण समाज के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. इस बैठक को आगामी चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है.
समाजवादी पार्टी कार्यालय में होने वाली बैठक में पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसद शामिल होंगे. कार्यक्रम की जिम्मेदारी बलिया से सांसद सनातन पाण्डेय को सौंपी गई है. बैठक में ब्राह्मण सम्मेलन की आयोजन समिति को अंतिम रूप दिया जाएगा और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार होगा.
जनेश्वर मिश्र जयंती पर विशेष फोकस
पार्टी पांच अगस्त को जनेश्वर मिश्र जयंती के अवसर पर ब्राह्मण समाज को विशेष संदेश देने की तैयारी कर रही है. सपा नेतृत्व मानता है कि यह अवसर सामाजिक संवाद और राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.
Also Read
क्यों अहम हैं ब्राह्मण वोटर?
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय की आबादी करीब 12 से 14 प्रतिशत मानी जाती है. राज्य की 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर इस वर्ग का प्रभाव देखा जाता है. पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई क्षेत्रों में ब्राह्मण मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. यही कारण है कि प्रमुख राजनीतिक दल लगातार इस वर्ग को साधने की कोशिश करते हैं.
सियासी माहौल और बढ़ी सक्रियता
हाल के महीनों में यह चर्चा तेज रही है कि ब्राह्मण समाज का एक वर्ग भाजपा से नाराज है. विभिन्न राजनीतिक बयान और कुछ विवादित मुद्दों ने इस बहस को और हवा दी. ऐसे माहौल में सपा अपने लिए नए राजनीतिक अवसर तलाश रही है और इसी वजह से ब्राह्मण समाज के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दे रही है.
बसपा भी मैदान में
ब्राह्मण वोटरों को लेकर बहुजन समाज पार्टी भी सक्रिय नजर आ रही है. बसपा प्रमुख मायावती लगातार 2007 के सामाजिक समीकरणों का उल्लेख कर रही हैं. वहीं, सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी की टिप्पणी को लेकर हुए विवाद के बाद विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. ऐसे में आने वाले महीनों में ब्राह्मण राजनीति उत्तर प्रदेश की चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती है.