ब्रजमंडल में शोक की लहर, राधा रानी के अनन्य भक्त पद्मश्री रमेश बाबा ने ली अंतिम सांस
बरसाना के प्रसिद्ध संत और पद्मश्री सम्मानित रमेश बाबा का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने गहवर वन स्थित मान मंदिर में अंतिम सांस ली. उनका अंतिम संस्कार 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे गहवर वन में होगा.
मथुरा के बरसाना स्थित मान मंदिर के संस्थापक और पद्मश्री से सम्मानित संत रमेश बाबा का निधन हो गया. 90 वर्षीय संत रमेश बाबा ने इंदिरा एकादशी के दिन गहवर वन स्थित अपने आश्रम में अंतिम सांस ली. राधा रानी के अनन्य भक्त माने जाने वाले रमेश बाबा ने अपना पूरा जीवन ब्रज संस्कृति, गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और संकीर्तन को समर्पित कर दिया था.
उनके निधन की खबर सामने आते ही ब्रजमंडल के साधु-संतों, श्रद्धालुओं और अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई. संत रमेश बाबा का जन्म वर्ष 1938 में प्रयागराज में हुआ था. उनके पिता बलदेव प्रसाद शुक्ल प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे, जबकि उनकी माता का नाम हेमेश्वरी देवी था. बाल्यावस्था में ही वैराग्य की भावना से वह बरसाना आ गए थे. इसके बाद उन्होंने अपना अधिकांश जीवन गहवर वन की पवित्र भूमि पर साधना और ब्रज सेवा में बिताया.
70 वर्षों तक की गहवर वन में कठोर साधना
बताया जाता है कि संत रमेश बाबा ने करीब 70 वर्षों तक गहवर वन में कठोर साधना की. उन्होंने बरसाना के राधारानी मंदिर में मृदंग बजाकर और संकीर्तन के माध्यम से राधा नाम का प्रचार किया. बाद में उन्होंने ब्रह्मांचल पर्वत पर मान मंदिर आश्रम की स्थापना की, जो आगे चलकर श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन गया.
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बरसाना में माताजी गोशाला की रखी नींव
रमेश बाबा को केवल आध्यात्मिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि गौ सेवा और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी विशेष पहचान मिली. उन्होंने बरसाना में माताजी गोशाला की नींव रखी. इसे एशिया की सबसे बड़ी गौशालाओं में गिना जाता है. गौ सेवा के साथ उन्होंने ब्रज के पर्वतों और गहवर वन के संरक्षण के लिए भी लंबे समय तक प्रयास किए.
संत रमेश बाबा ने यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने और ब्रज के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करने के लिए भी आंदोलन चलाए. उनके काम और विचारों से प्रभावित होकर देश-विदेश से श्रद्धालु बरसाना पहुंचते थे. बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए मान मंदिर आते रहे.
पद्मश्री से सम्मानित
ब्रज संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और गौ सेवा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था. यह सम्मान उनके दशकों लंबे सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरणीय योगदान की पहचान बना.
अनुयायियों और संत समाज के लिए भावुक क्षण
संत रमेश बाबा के निधन से ब्रजभूमि ने एक ऐसे संत को खो दिया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राधा रानी की भक्ति और ब्रज सेवा में लगा दिया. उनके अनुयायियों और संत समाज के लिए यह बेहद भावुक क्षण है. उनके अंतिम संस्कार की तैयारी गहवर वन में की जा रही है और 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
रमेश बाबा के गोलोक गमन की खबर से बरसाना और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है. उनके अनुयायी उन्हें केवल संत के रूप में नहीं, बल्कि ब्रज की संस्कृति, प्रकृति और गौ सेवा के एक बड़े संरक्षक के रूप में याद कर रहे हैं.