अटकी हुई प्रॉपर्टी पाने का सुनहरा मौका, योगी सरकार ने पीड़ितों को दी बड़ी राहत, यहां जानें OTS योजना के पूरे नियम

योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है. ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 100 रुपये फीस और 5000 रुपये शुल्क तय किया गया है.

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Anuj

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में फंसी संपत्तियों को लेकर परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने आवंटियों के हित में एकमुश्त समाधान (ओटीएस) योजना लागू कर दी है, जिससे डिफॉल्टर आवंटियों को बिना दंड ब्याज के अपनी संपत्ति पर कब्जा पाने का मौका मिलेगा. इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों को सुलझाना और लोगों को आर्थिक बोझ से राहत देना है.

प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, यह योजना सभी प्रकार की संपत्तियों पर लागू होगी. इसमें डिफॉल्टर आवंटियों से केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा और दंड ब्याज पूरी तरह माफ रहेगा. यह कदम उन लोगों के लिए खास राहत लेकर आया है, जो समय पर भुगतान न कर पाने के कारण अतिरिक्त शुल्क के बोझ तले दबे हुए थे.

अलग-अलग शुल्क निर्धारित

योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है. ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 100 रुपये फीस और 5000 रुपये शुल्क तय किया गया है. एलआईजी के लिए 500 रुपये फीस और 10 हजार रुपये शुल्क देना होगा. वहीं, अन्य आवासीय और मिश्रित उपयोग वाली संपत्तियों के लिए 2100 रुपये फीस और 50 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. ग्रुप हाउसिंग और संस्थागत संपत्तियों के लिए यह राशि और अधिक है.

एक महीने का अतिरिक्त समय

भुगतान प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है. 50 लाख रुपये तक की देनदारी वाले आवंटियों को कुल राशि का एक-तिहाई 30 दिनों के भीतर जमा करना होगा, जबकि बाकी रकम तीन मासिक किस्तों में चुकानी होगी. 50 लाख से अधिक की राशि पर भी इसी तरह की व्यवस्था है, लेकिन शेष रकम छह महीने में चुकानी होगी. और समय पर भुगतान न करने पर एक महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, लेकिन इसके साथ दंड ब्याज भी देना पड़ेगा.

मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगाने की तैयारी

इसके अलावा सरकार ने विकास प्राधिकरण की संपत्तियों की कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी है. इसके लिए नई नीति लाई जाएगी, जिससे संपत्तियों की कीमत तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी और संतुलित हो सके. अधिकारियों का मानना है कि इससे आम लोगों के लिए घर खरीदना आसान हो जाएगा और रियल एस्टेट सेक्टर में भी स्थिरता आएगी.