कानपुर में रेलवे का नया कमाल, पहिया जाम होने से पहले ही बजेगा अलार्म, हादसे रोकने के लिए हाई-टेक ट्रायल शुरू
रेल इंजन के पहिए जाम होने से ट्रेन की रफ्तार प्रभावित होती है और कभी-कभी दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है. इस समस्या को रोकने के लिए वाइब्रेशन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाया जा रहा है. यह सिस्टम पहियों और बेयरिंग में होने वाली छोटी-छोटी कंपन को पहले ही पकड़ लेता है.
कानपुर: अब ट्रेन चलते समय पहियों के जाम होने या इंजन में खराबी आने से पहले ही लोको पायलट को अलार्म बजकर चेतावनी देगा. भारतीय रेलवे ने इस समस्या को हल करने के लिए नई तकनीक अपनाने की शुरुआत कर दी है. कानपुर के इलेक्ट्रिक लोको शेड फजलगंज में इसकी ट्रायल शुरू हो गया है.
कानपुर में रेलवे का नया कमाल
रेल इंजन के पहिए जाम होने से ट्रेन की रफ्तार प्रभावित होती है और कभी-कभी दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है. इस समस्या को रोकने के लिए वाइब्रेशन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाया जा रहा है. यह सिस्टम पहियों और बेयरिंग में होने वाली छोटी-छोटी कंपन को पहले ही पकड़ लेता है. जब भी कोई खराबी शुरू होती है, लोको पायलट के केबिन में अलार्म बज जाता है. इससे ड्राइवर को तुरंत पता चल जाता है और समय रहते समस्या को ठीक किया जा सकता है.
कानपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड ने पिछले हफ्ते मालगाड़ी के एक इंजन में यह सिस्टम लगा दिया है. अगर ट्रायल सफल रहा तो इसे शेड में आने वाले सभी इंजनों में लगाया जाएगा. बाद में चरणबद्ध तरीके से पहले वीवीआईपी ट्रेनों, फिर वीआईपी ट्रेनों और अंत में बाकी सभी ट्रेनों में यह तकनीक लगाई जाएगी.
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दिल्ली मेट्रो से ली गई प्रेरणा
यह तकनीक नई नहीं है. दिल्ली मेट्रो में यह सिस्टम पहले से सफलतापूर्वक चल रहा है. वहां अच्छे नतीजे मिलने के बाद भारतीय रेलवे ने भी इसे अपनाने का फैसला किया है. कानपुर शेड के इंजीनियरों ने दुनियाभर में मशहूर बेयरिंग कंपनी एसकेएफ से यह सिस्टम और सॉफ्टवेयर लिया है. इसके बाद लोकल स्तर पर जरूरी बदलाव करके इसे इंजन में फिट किया गया है.
लोको शेड के मंडल विद्युत अभियंता आलोक मिश्र ने बताया कि इंजन में मोटर की समस्या से एक्सल गर्म हो जाता है और पहिए जाम हो जाते हैं. पिछले साल ऐसे कारणों से 10 इंजन फेल हो गए थे. नई तकनीक से पहले ही खराबी का पता चल जाएगा. इससे ट्रेनों की देरी कम होगी और सुरक्षा भी बढ़ेगी.
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
वाइब्रेशन मॉनीटरिंग सिस्टम इंजन के महत्वपूर्ण पार्ट्स पर लगे सेंसर के जरिए लगातार मॉनिटरिंग करता है. जैसे ही कंपन का स्तर सामान्य से ज्यादा होता है, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है. यह रियल टाइम में काम करता है और डेटा को भी रिकॉर्ड रखता है. इससे रखरखाव की टीम को भी आसानी होती है.