राम मंदिर में पुजारियों के लिए लागू हुआ नया ड्रेस कोड, पीली रेशमी धोती-उत्तरीय पहनना अनिवार्य

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में शनिवार से पुजारियों की वेशभूषा को लेकर नए नियम लागू हो गए हैं. अब सभी पुजारी रामानंदी परंपरा के अनुसार एक समान पीले रंग की रेशमी धोती और उत्तरीय में नजर आएंगे.

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Shanu Sharma

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में शनिवार से पुजारियों के लिए नई वेशभूषा लागू कर दी गई. मंदिर प्रशासन की धार्मिक समिति ने पूजा और सेवा व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए यह व्यवस्था तय की है. नए नियम के मुताबिक सभी पुजारी हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और इसी रंग का रेशमी उत्तरीय धारण करेंगे.

धार्मिक समिति की सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण के अनुसार, यह परिधान रामानंदी परंपरा को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार पीला रंग भगवान राम को प्रिय माना जाता है, इसलिए इसे पुजारियों की वेशभूषा का आधार बनाया गया है.

बाल और तिलक को लेकर भी नियम

नई व्यवस्था में केवल कपड़ों ही नहीं, बल्कि पुजारियों की साज-सज्जा के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. अर्चकों को या तो पंचकेश परंपरा के अनुसार बाल रखने होंगे या फिर पूरी तरह से मुंडित रहना होगा. बीच की स्थिति यानी आधे बढ़े बाल या दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं होगी.


इसके अलावा सभी पुजारियों के लिए रामानंदी परंपरा का तिलक लगाना भी जरूरी किया गया है. धार्मिक समिति का कहना है कि निर्धारित वेशभूषा और साज-सज्जा से मंदिर की पूजा व्यवस्था में अनुशासन के साथ धार्मिक गरिमा भी बनी रहेगी.

मौसम के हिसाब से बदलेगा कपड़ा

मंदिर में पुजारियों के कपड़े मौसम के अनुसार बदले जाएंगे. हालांकि, परिधान का रंग पीत ही रहेगा. गर्म मौसम में रेशमी वस्त्रों का इस्तेमाल होगा, जबकि शरद ऋतु और सर्दियों के दौरान अर्चकों को मौसम के अनुरूप ऊनी कपड़े उपलब्ध कराए जाएंगे.

समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास ने बताया कि वस्त्रों के चयन में शुचिता और धार्मिक परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है. इसी कारण पूजा व्यवस्था में सिले हुए कपड़ों के बजाय निर्धारित प्रकार के वस्त्रों को प्राथमिकता दी गई है.

सावन झूला मेले से जुड़ी खास परंपरा

इसी बीच अयोध्या में 15 अगस्त से वार्षिक सावन झूला मेला भी शुरू हो चुका है. यह आयोजन 28 अगस्त तक चलेगा. मेले के पहले दिन मणि पर्वत पर भगवान राम और माता सीता के पारंपरिक झूला विहार का आयोजन किया गया. सावन के इस धार्मिक आयोजन के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं की चहल-पहल भी बढ़ गई है.