जन सेवा केंद्र की आड़ में चल रहा था साइबर ठगी का अड्डा, मेरठ पुलिस ने मौलाना बाप-बेटे को दबोचा

मेरठ पुलिस ने जन सेवा केंद्र की आड़ में साइबर ठगी करने वाले मौलाना बाप-बेटे को गिरफ्तार किया. पुलिस ने 139 ID, 180 आधार, 97 पैन कार्ड और 10 बैंक पासबुक बरामद कीं.

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Kanhaiya Kumar Jha

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसा मामला सामने आया है जो यह बताता है कि साइबर अपराधी किस तरह आम लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें लूटते हैं. मेरठ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस गिरोह को चला रहे थे एक मौलाना और उनका बेटा, जो बाहर से एक सामान्य जन सेवा केंद्र संचालक की तरह दिखते थे लेकिन अंदर से एक पूरा ठगी का तंत्र चला रहे थे.

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने अपनी ठगी को छुपाने के लिए जन सेवा केंद्र की आड़ ली. जन सेवा केंद्र वह जगह होती है जहाँ आम लोग सरकारी काम, दस्तावेज और अन्य ज़रूरी सेवाओं के लिए जाते हैं. लोगों का इन केंद्रों पर स्वाभाविक भरोसा होता है और आरोपियों ने इसी भरोसे को अपना हथियार बनाया. जो लोग अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और पहचान पत्र लेकर इनके पास पहुंचते थे, वे यह सोचकर आते थे कि उनका काम होगा. लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ किया जाएगा.

ऐसे चलता था ठगी का खेल

आरोपी मौलाना और उनका बेटा भोले-भाले लोगों से उनके पहचान पत्र लेते थे और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाते थे. ये खाते किसी और के नाम पर होते थे लेकिन इन पर आरोपियों का नियंत्रण रहता था. साइबर ठगी से आई रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर की जाती थी और फिर उसे निकाल लिया जाता था. यह तरीका इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि जब पुलिस जांच करती है तो खाता जिस निर्दोष व्यक्ति के नाम पर होता है, पहले उसी पर शक जाता है. असली अपराधी पर्दे के पीछे छुपे रहते हैं.


पुलिस को मिले चौंकाने वाले सबूत

जब मेरठ पुलिस ने इन दोनों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे की तलाशी ली तो जो बरामद हुआ वह इस पूरे गिरोह की असली तस्वीर सामने रख गया. पुलिस को इनके पास से 139 ID कार्ड, 180 आधार कार्ड, 97 पैन कार्ड और 10 बैंक पासबुक मिली हैं. यह सारे दस्तावेज अलग-अलग लोगों के हैं जो या तो इनके जाल में फँस चुके थे या जिनकी जानकारी किसी और तरीके से हासिल की गई थी. इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों का मिलना यह साफ करता है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित और लंबे समय से चला आ रहा अपराध है.