'जब से मैंने आकाश आनंद को आगे किया है...', क्या राजनीति से संन्यास लेने वाली हैं मायावती?
Mayawati: राजनीति से संन्यास लेने की खबरों को बसपा चीफ मायावती ने फर्जी बताया है. उन्होंने कहा है कि जब से आकाश आनंद को उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया गया है, तब से ही इस तरह की फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि है कि अंतिम सांस तक वह पार्टी के लिए सक्रिय रहेंगी और लगातार काम करती रहेंगी.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती इन दिनों लगातार चर्चा में हैं. पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक नेता ने उन्हें सबसे भ्रष्ट सीएम बता दिया था. अब सोशल मीडिया पर उनके संन्यास की खबरें चर्चा में हैं. ऐसे में मायावती ने खुद सामने आकर जवाब दिया है. मायावती ने कहा है कि इस तरह की खबरें पूरी तरह से फर्जी हैं और संन्यास का तो कोई सवाल ही नहीं उठता है. मायावती ने यह भी बता दिया है कि वह आजीवन राजनीति में सक्रिय रहेंगी. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि जब से उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपने उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया है तब से ही इस तरह की तमाम अफवाहें फैलाई जा रही हैं.
ऐसी चर्चाओं के बारे में मायावती ने लिखा है, 'बहुजनों के आंबेडकरवादी कारवां को कमजोर करने की विरोधी पार्टियों की साजिशों को विफल करने के संकल्प के कारण ही मैं मान्यवर कांशीराम जी की तरह ही अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक बीएसपी और इसके आत्मसम्मान को समर्पित रहूंगी. राजनीति से संन्यास लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.' उन्होंने लिखा है कि पहले भी इस तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं कि मायावती को राष्ट्रपति बनाया जाएगा.
'दुष्प्रचार से सावधान रहें...'
उन्होंने आगे लिखा है, 'जब से आकाश आनंद को मेरे ना रहने पर या अस्वस्थ विकट हालत में उसे बीएसपी के उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया है तब से जातिवादी मीडिया, ऐसी फेक न्यूज प्रचारित कर रहा है जबकि ऐसी अफवाहें षड्यंत्र के तहत केवल पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने के लिए होती हैं. लोग ऐसे दुष्प्रचार से जरूर सावधान रहें.'
मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) को भी आड़े हाथ लिया है. उन्होंने लिखा है, 'सपा जिसने 2 जून 1995 में बीएसपी द्वारा समर्थन वापिसी पर मुझ पर जानलेवा हमला कराया था तो इस पर कांग्रेस कभी क्यों नहीं बोलती है? जबकि उस दौरान केन्द्र में रही कांग्रेसी सरकार ने भी समय से अपना दायित्व नहीं निभाया था. तभी फिर मान्यवर कांशीराम जी को अपनी बीमारी की गम्भीर हालत में भी हॉस्पिटल छोड़कर रात को इनके गृह मन्त्री को भी हड़काना पड़ा था तथा विपक्ष ने भी संसद को घेरा, तब जाकर यह कांग्रेसी सरकार हरकत में आई थी.'