पद्मश्री से सम्मानित मंगला कपूर की कहानी कर देगी भावुक, पीएम मोदी ने भी दिया आदर
पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर मंगला कपूर ने संघर्ष, संगीत और शिक्षा के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई. राष्ट्रपति भवन में सम्मान ग्रहण करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका भावुक क्षण चर्चा का विषय बन गया.
भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित गायिका और शिक्षाविद् प्रोफेसर मंगला कपूर को राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया. काशी की लता के नाम से प्रसिद्ध मंगला कपूर ने अपने जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. सम्मान समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात का एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
सम्मान समारोह में दिखा भावुक पल
राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान जब प्रोफेसर मंगला कपूर का नाम पुकारा गया तो वह मंच पर पहुंचीं. सम्मान ग्रहण करने से पहले उन्होंने वहां मौजूद गणमान्य लोगों का अभिवादन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान व्यक्त किया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने भी विशेष आत्मीयता दिखाते हुए उनके प्रति आदर प्रकट किया. समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया. यह क्षण कार्यक्रम के सबसे चर्चित पलों में शामिल रहा.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
मंगला कपूर का जीवन असाधारण साहस की कहानी है. बचपन में उन पर एक गंभीर हमला हुआ था, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी. इसके बाद उन्हें लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कई सर्जरी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. परिवार, विशेष रूप से उनके पिता का सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना. कठिन दौर से निकलकर उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा दी और शिक्षा तथा संगीत को अपना उद्देश्य बनाया.
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संगीत और शिक्षा में बनाई अलग पहचान
प्रोफेसर मंगला कपूर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संगीत विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त की. ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी पूरी करने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य शुरू किया. तीन दशक से अधिक समय तक विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देने के साथ-साथ उन्होंने मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए भी अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी सुरीली आवाज और संगीत के प्रति समर्पण ने उन्हें देशभर में सम्मान दिलाया.
‘काशी की लता’ के रूप में मिली विशेष पहचान
संगीत जगत में उत्कृष्ट योगदान के कारण मंगला कपूर को वर्षों पहले ‘काशी की लता’ की उपाधि दी गई थी. यह सम्मान वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत में उनके महत्वपूर्ण स्थान को दर्शाता है. संगीत के अलावा उन्होंने दिव्यांग लोगों के लिए भी लगातार काम किया और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई. पद्मश्री सम्मान उनके लंबे संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है.