होर्मुज से राहत की खबर, भारत के लिए रवाना हुए 11 जहाज; पहुंचेगी तेल और खाद की बड़ी खेप

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग में गतिविधियां सामान्य होने लगी हैं. भारत के लिए तेल और उर्वरक लेकर 11 जहाज रवाना हो चुके हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से बनी अनिश्चितता के बीच एक सकारात्मक घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद होर्मुज जलमार्ग में फंसे जहाजों की आवाजाही फिर से तेज होने लगी है. भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है क्योंकि देश की ऊर्जा और उर्वरक जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है. अब तेल और उर्वरक से लदे कई जहाज भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ चुके हैं.

17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद क्षेत्र में तनाव कम होता दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही होर्मुज जलमार्ग में फंसे जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 11 जहाज भारत की ओर रवाना हो चुके हैं, जबकि कुछ अन्य जहाज भी प्रस्थान की तैयारी में हैं.

भारत के लिए रवाना हुए अहम जहाज

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि भारत की ओर आने वाले जहाजों में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, एलपीजी और उर्वरक मौजूद हैं. तीन भारतीय जहाजों में लगभग 2.85 लाख मैट्रिक टन कच्चा तेल भरा हुआ है. इसके अलावा एक एलपीजी और एक अन्य तेल टैंकर भी भारत के लिए रवाना हुआ है. छह जहाज उर्वरक लेकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं.


अभी भी कुछ जहाज होर्मुज में मौजूद

हालात सामान्य होने के बावजूद कुछ भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं. विदेश मंत्रालय के मुताबिक लगभग 10 भारतीय जहाज अभी वहां हैं, लेकिन उनके भी जल्द भारत की ओर रवाना होने की संभावना है. इसी दौरान तीन भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में पहुंचे हैं, जिससे समुद्री गतिविधियों में सुधार का संकेत मिल रहा है.

संकट के दौरान फंसे थे कई टैंकर

पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के समय फरवरी और मार्च 2026 में लगभग 24 भारतीय जहाज होर्मुज क्षेत्र में फंस गए थे. इनमें अधिकांश जहाज कच्चा तेल, एलपीजी और उर्वरक लेकर चल रहे थे. समुद्री मार्ग पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया था, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता था.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका

होर्मुज जलमार्ग भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले आयात पर निर्भर करता है. इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से तेल आपूर्ति का प्रमुख रास्ता यही है. ऐसे में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.