378 फ्लैट मालिकों को राहत! लखनऊ देवपुर पारा में लॉटरी से पार्किंग आवंटन
अधिकारियों के मुताबिक, योजना के छह ब्लॉकों में ओपन, स्टिल्ट और बेसमेंट पार्किंग को मिलाकर कुल 378 पार्किंग स्थल उपलब्ध थे. वहीं, अब तक 622 आवंटी अपने फ्लैटों की रजिस्ट्री करा चुके हैं, जिसके कारण पार्किंग की मांग उपलब्ध संख्या से कहीं ज्यादा थी.
लखनऊ: लखनऊ के कबीर नगर स्थित देवपुर पारा योजना में रहने वाले फ्लैट मालिकों के लिए लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है. पार्किंग आवंटन का इंतजार कर रहे सैकड़ों आवंटियों को बुधवार को राहत मिली, जब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करते हुए पार्किंग स्थलों का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया. इस कदम से योजना के निवासियों में संतोष का माहौल देखने को मिला.
LDA के कमेटी हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देवपुर पारा योजना के एमआईजी श्रेणी के फ्लैटों के लिए उपलब्ध पार्किंग स्थलों का आवंटन किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, योजना के छह ब्लॉकों में ओपन, स्टिल्ट और बेसमेंट पार्किंग को मिलाकर कुल 378 पार्किंग स्थल उपलब्ध थे. वहीं, अब तक 622 आवंटी अपने फ्लैटों की रजिस्ट्री करा चुके हैं, जिसके कारण पार्किंग की मांग उपलब्ध संख्या से कहीं ज्यादा थी.
पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ आवंटन
एलडीए ने पूरे आवंटन को निष्पक्ष और विवाद रहित बनाने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपनाई. कार्यक्रम के दौरान आवंटियों की मौजूदगी में पर्चियां निकलवाई गईं और उसी आधार पर क्रमवार पार्किंग आवंटित की गई. इस प्रक्रिया ने पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के साथ-साथ आवंटियों का भरोसा भी बढ़ाया.
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378 आवंटियों को मिला लाभ
अधिकारियों के अनुसार, लॉटरी के जरिए कुल 378 पात्र आवंटियों को पार्किंग स्थल आवंटित किए गए हैं. पार्किंग मिलने के बाद कई आवंटियों ने राहत व्यक्त की और एलडीए द्वारा अपनाई गई निष्पक्ष प्रक्रिया की सराहना की.
जिनको नहीं मिली पार्किंग, उनके लिए भी योजना
LDA के अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा ने बताया कि जिन लोगों को इस चरण में पार्किंग नहीं मिल पाई है, उन्हें भविष्य में प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग सुविधा में स्थान उपलब्ध कराया जाएगा. इससे बाकी आवंटियों को भी आगे चलकर पार्किंग की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है.
लंबे समय से उठ रही थी मांग
देवपुर पारा योजना के निवासी काफी समय से पार्किंग आवंटन की मांग कर रहे थे. सीमित पार्किंग स्थलों और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए एलडीए ने इस समस्या के समाधान के लिए लॉटरी का रास्ता चुना. अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रखने का उद्देश्य सभी आवंटियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना था.