Youtuber अभिषेक मल्हान ने असम बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए उठाया बढ़ा कदम, 20 लाख से बनेगा हनुमान मंदिर

अभिषेक मल्हान ने असम बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के साथ एक क्षतिग्रस्त हनुमान मंदिर के पुनर्निर्माण का जिम्मा उठाया है.

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Ashutosh Rai

असम में आई बाढ़ ने कई परिवारों के साथ धार्मिक स्थलों को भी नुकसान पहुंचाया. इसी बीच YouTuber अभिषेक मल्हान ने मदद का हाथ बढ़ाया है. उन्होंने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ मिलकर बाढ़ राहत में योगदान दिया और अब बाढ़ से खराब हुए हनुमान मंदिर को दोबारा बनाने की पहल शुरू की है.

बाढ़ प्रभावित मंदिर के लिए आगे आए अभिषेक

अभिषेक मल्हान ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें असम में बाढ़ से प्रभावित एक हनुमान मंदिर के पुनर्निर्माण में योगदान देने का मौका मिला है. उन्होंने उस जगह का वीडियो भी साझा किया, जहां हनुमान की मूर्ति मौजूद थी और बाढ़ के कारण काफी नुकसान हुआ. मंदिर के दोबारा निर्माण की शुरुआत पूजा के साथ की गई। इस दौरान अभिषेक नारियल तोड़ते, स्थानीय लोगों को खाना बांटते और उनसे बातचीत करते नजर आए. उन्होंने इस पहल को अपने लिए खास बताया और कहा कि वह मंदिर के निर्माण में अपनी तरफ से योगदान देकर खुश हैं.

5 लाख से शुरू हुई पहल

अभिषेक के मुताबिक, उन्होंने मंदिर के निर्माण के लिए शुरुआत में 5 लाख देने का संकल्प लिया था. इसके बाद ट्रू होप फाउंडेशन ने भी इस पहल में रुचि दिखाई और अपनी तरफ से 15 लाख और जोड़ने का फैसला किया. इस तरह मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कुल रकम करीब 20 लाख हो गई. अभिषेक ने कहा कि उनके लिए सिर्फ पैसे का योगदान महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इस काम का हिस्सा बनना ज्यादा मायने रखता है. उन्होंने पूजा के साथ शुरू हुए इस काम को बजरंग बली का आशीर्वाद बताया और मंदिर को दोबारा तैयार करने की इच्छा जाहिर की.


असम बाढ़ में कई इलाके हुए प्रभावित

असम में 19 जुलाई से शुरू हुई बाढ़ ने कई इलाकों में परेशानी बढ़ाई. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गोलाघाट सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रहा, जहां 71 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए. इसके बाद शिवसागर में 21 हजार से ज्यादा और जोरहाट में 13 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए. इसी राहत प्रयास के तहत अभिषेक ने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ साझेदारी की. अब मंदिर के पुनर्निर्माण की यह पहल भी उनकी मदद का हिस्सा है. उन्होंने लोगों के साथ समय बिताकर उनकी स्थिति समझने और जरूरत के समय सहयोग देने की कोशिश की.