कांवड़ मार्ग पर UP सरकार के आदेश पर अब NDA में शामिल दलों ने उठाए सवाल, RLD बोली- इसकी क्या जरूरत?
Kanwar Route Order News: कांवड़ मार्ग पर खाने-पीने के दुकानों और फलों के दुकानों पर नाम लिखने वाले UP सरकार के आदेश पर अब NDA में शामिल दलों ने सवाल उठाए हैं. RLD ने कहा है कि आखिर इसकी क्या जरूरत है. वहीं जदयू ने कहा कि धार्मिक स्तर पर सीमांकन नहीं किया जा सकता है. इससे पहले कांग्रेस और AIMIM योगी सरकार के आदेश पर सवाल उठा चुकी है.
Kanwar Route Order News: भाजपा के सहयोगी दल जदयू और रालोद ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस के उस आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें निर्देश दिया गया है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों और ठेलों पर उनके मालिकों के नाम प्रदर्शित किए जाएं. इससे पहले कांग्रेस और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी योगी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया था. हालांकि, विपक्षी दलों के सवाल उठाए जाने के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने गुरुवार को एक ताजा एडवाइजरी जारी की, जिसमें कहा गया कि दुकानदार अपना और अपने कर्मचारियों का नाम अपनी इच्छा से प्रदर्शित कर सकते हैं.
हालांकि, भाजपा ने पुलिस के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि ये उपवास करने वाले हिंदुओं को शुद्ध शाकाहारी रेस्तरां में भोजन करने का विकल्प देता है, जहां उन्हें सात्विक भोजन परोसे जाने की संभावना अधिक होती है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि बिहार, यूपी और बिहार समेत देश भर में कई जगहों पर कांवड़ यात्रा निकाली जाती है. यहां कभी भी सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ. अगर कोई असामाजिक तत्व है, तो पुलिस उनसे निपटने में सक्षम है. अगर हम धार्मिक स्तर पर सीमांकन करेंगे, तो सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचेगा.
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उस इलाके में, जहां से यात्रा गुजरती है, ऐसी जगहें हैं जहां 30-40% आबादी मुस्लिम है. मुस्लिम कारीगर तीर्थयात्रियों की ओर से लाए जाने वाले कांवड़ बनाने और यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में भी शामिल होते हैं. त्यागी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए उठाए गए कदम ठीक हैं, लेकिन ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे सांप्रदायिक विभाजन पैदा हो.
आरएलडी ने भी मुजफ्फरनगर पुलिस के इस निर्देश पर उठाए सवाल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से मजबूत माने जाने वाले आरएलडी ने भी मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से इस तरह के निर्देश की जरूरत पर सवाल उठाया है. आरएलडी के प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि उन्हें सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करानी चाहिए, लेकिन लोगों को दुकानों पर अपना नाम दिखाने के लिए बाध्य करने की जरूरत नहीं है. ये प्रशासन का काम नहीं है.
भाजपा के सीनियर नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने एक एक्स पोस्ट में लिखा कि कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के जल्दबाजी के आदेश परेशानी पैदा करेंगे... छुआछूत की बुराई को बढ़ावा देंगे. आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन अस्पृश्यता को संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए.
बाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांवड़ यात्रा में शामिल होने की अपनी एक फोटो पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें कांवड़ यात्रा के प्रति सम्मान और आस्था के बारे में किसी से कोई उपदेश नहीं चाहिए.
मुजफ्फरनगर पुलिस के नए आदेश में क्या?
मुजफ्फरनगर प्रशासन ने गुरुवार को एक नए आदेश में दुकानदारों से स्वेच्छा से अपने नाम प्रदर्शित करने का आग्रह किया. नोटिस में कहा गया है कि श्रावण के पवित्र महीने के दौरान, कई लोग, खासकर कांवड़िए, अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं. अतीत में, कुछ ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं, जहां कांवड़ यात्रा मार्ग पर कुछ खाद्य विक्रेताओं ने अपनी दुकानों के नाम इस तरह रखे हैं, जिससे यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई है. इस साल ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति से बचने और भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए, मार्ग के किनारे स्थित होटलों, ढाबों और अन्य खाद्य पदार्थ विक्रेताओं के मालिकों और स्वामियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी मर्जी से अपने मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करें.
नोटिस में आगे कहा गया है कि इस आदेश का उद्देश्य कोई धार्मिक मतभेद पैदा करना नहीं है, बल्कि केवल भक्तों की सुविधा के लिए है... और किसी भी आरोप और कानून व्यवस्था की स्थिति से बचना है. इस तरह के आदेश पहले भी प्रचलित रहे हैं.
सहारनपुर रेंज DIG अजय कुमार साहनी क्या बोले?
पुलिस उप महानिरीक्षक (सहारनपुर रेंज) अजय कुमार साहनी ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कुछ दुकानों पर मांसाहारी खाद्य पदार्थ बेचे गए या कुछ खास धार्मिक समुदायों के लोगों ने दूसरे समुदाय के नाम पर दुकानें खोलीं. उन्होंने कहा कि मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था कि ऐसी कोई समस्या न पैदा हो. उन्होंने कहा कि मालिक और प्रोपराइटर स्वेच्छा से ऐसा करने के लिए सहमत हुए हैं.
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि लगभग दो दशक पहले, दिल्ली में सभी भोजनालयों में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी. मुंबई में रेस्तरां का नाम, मालिक, कॉन्टैक्ट नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था. अगर यह भेदभावपूर्ण नहीं था, तो मुजफ्फरनगर में एक आदेश को अलग नजरिए से क्यों देखा जाना चाहिए, सिर्फ इसलिए कि यह उत्तर प्रदेश है? भारत की 'धर्मनिरपेक्षता' इतनी कमजोर नहीं हो सकती कि सभी भोजनालयों को मालिक/कर्मचारियों का नाम और संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के लिए कहने वाला एक समान आदेश इसे बाधित करे... क्या हिंदुओं को समान अधिकार देना पाप है?
मालवीय ने धर्मनिरपेक्षतावादियों पर ये मानने का भी आरोप लगाया कि ये आदेश मुसलमानों के खिलाफ़ है. क्योंकि वे जानते हैं कि कई मुसलमान कोचिंग संस्थानों से लेकर खाने-पीने की दुकानों तक अपने व्यवसायों के लिए हिंदू नाम रखते हैं और न केवल धार्मिक संवेदनाओं का उल्लंघन करते हैं, बल्कि धर्मांतरण और उससे भी बदतर काम करते हैं.
बिहार के बांका से जदयू सांसद बोले- धर्म श्रद्धा की चीज है
बिहार के बांका से जेडीयू के लोकसभा सांसद गिरिधारी यादव ने कहा कि बांका कांवड़ यात्रा के मार्ग पर पड़ता है. मुझे कांवड़ यात्रा के दौरान हिंदू-मुस्लिम मुद्दा नहीं पता है. हमारे राज्य में हिंदू और मुसलमान एक साथ रहते हैं… धर्म श्रद्धा की चीज़ है. हम मुस्लिम त्योहारों में शामिल होते हैं और वे भी हमारे धर्म का सम्मान करते हैं. एक अन्य जेडीयू सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि जिन्होंने आदेश जारी किया है, उनसे पूछिए. मैं इस मामले में क्या कह सकता हूं?
आदेश के बाद और नई एडवाइजरी पर क्या बोले अखिलेश यादव?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश की आलोचना करते हुए इसे समाज को विभाजित करने के उद्देश्य से किया गया एक सामाजिक अपराध बताया. उन्होंने न्यायपालिका से कार्रवाई करने का आग्रह भी किया. हालांकि, मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से जारी नई एडवाइजरी को उन्होंने प्रेम और सद्भाव से पैदा हुई एकता की जीत बताया. अखिलेश ने गुरुवार को कहा कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने जनता के भाईचारे और विपक्ष के दबाव के आगे झुकते हुए, होटलों, फल विक्रेताओं और ठेले वालों को अपना नाम प्रदर्शित करने के प्रशासनिक आदेश को स्वैच्छिक बनाकर आखिरकार अपनी पीठ थपथपाई है… ऐसे आदेशों को पूरी तरह से खारिज किया जाना चाहिए.
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि ये आदेश दलितों के साथ-साथ मुसलमानों के भी खिलाफ है. उन्होंने कहा कि ये स्पष्ट नहीं है कि आर्थिक बहिष्कार किसके लिए है. खेड़ा ने कहा कि जो लोग तय करना चाहते थे कि कौन क्या खाएगा, वे अब यह भी तय करेंगे कि कौन क्या खरीदेगा और किससे खरीदेगा?
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब पहले भी इस तरह के खाद्य प्रतिबंधों के बारे में चिंता जताई गई थी, तो भाजपा की ओर से जवाब दिया गया था कि खाने-पीने की दुकानों पर हलाल मांस परोसने के बारे में ऐसी ही आपत्ति क्यों नहीं जताई गई? इसका जवाब यह है कि जब कोई होटल बोर्ड शुद्ध शाकाहारी कहता है, तब भी हम होटल के मालिक, रसोइए या वेटर का नाम नहीं पूछते.
हालांकि दुकानें या स्टॉल यह स्पष्ट करते हैं कि वे 'शुद्ध शाकाहारी', 'झटका', 'हलाल' परोसते हैं, जिससे उपभोक्ता को चुनाव करने में मदद मिलती है, लेकिन खेड़ा कहते हैं कि ढाबा मालिक का नाम लिखने से किसे फ़ायदा होगा? भारत के प्रमुख मांस निर्यातक हिंदू हैं. क्या हिंदुओं द्वारा बेचा गया मांस दाल भात बन जाता है? इसी तरह, क्या किसी अल्ताफ़ या राशिद की ओर से बेचे गए आम और अमरूद मांस बन जाएंगे?
मायावती ने भी आदेश को वापस लेने की मांग की थी
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि इस निर्देश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे एक गलत परंपरा शुरू हो गई है, जो सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाड़ सकती है. AIMIM अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को इस संबंध में लिखित आदेश पारित करना चाहिए. ओवैसी ने कहा कि हिटलर ने भी यहूदियों का बहिष्कार किया था. यूपी सरकार की ओर से भी इसी तरह का बहिष्कार किया जा रहा है... क्या एक यात्रा इतनी महत्वपूर्ण है कि आप दूसरों की आजीविका बर्बाद कर दें? क्या आप एक समुदाय के लिए काम करेंगे और फिर संविधान कहां है?