शौचालय में मिले 40 हजार रुपयों ने कैसे खोला राम मंदिर दान चोरी का राज?
अभी तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करीब 80 लाख रुपए की रिकवरी हो चुकी है. पूरे देश को SIT जांच का इंतजार है.
अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान गबन का मामला एक बेहद मामूली दिखने वाली घटना से सामने आया. मई के अंतिम सप्ताह में मंदिर परिसर के एक वॉशरूम में 40 हजार रुपये छिपे मिलने के बाद पूरे मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया. एक सतर्क गेटकीपर ने नकदी देखकर इसकी जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक ट्रस्टी को दी, जिसके बाद वरिष्ठ पदाधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई.
आंतरिक जांच के बाद पुलिस हुई सक्रिय
प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट को दान राशि में गड़बड़ी की आशंका हुई. इसके बाद ट्रस्ट ने पहले अपने स्तर पर आंतरिक जांच कराई और 4 जून को जिला प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी. सूचना मिलते ही पुलिस ने दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की और कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया. संदिग्ध कर्मचारियों से ट्रस्ट अधिकारियों की मौजूदगी में पूछताछ की गई.
17 घंटे में 80 लाख रुपये बरामद
पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने समन्वित छापेमारी अभियान चलाया. शिकायत दर्ज होने के महज 17 घंटे के भीतर पुलिस और ट्रस्ट प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने अयोध्या समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लगभग 80 लाख रुपये नकद बरामद किए. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर दान की राशि कैसे और कब से गबन की जा रही थी.
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दान व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. शुरुआत में 15 दिन की समय-सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में 1 जुलाई को 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया. जांच पूरी होने के बाद SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने वाली है. माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रशासन और दान संग्रह व गणना प्रणाली में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.