ना जाम ना प्रदूषण, मथुरा-वृंदावन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अब मिलेगी असली शांति, डीएम ने बताया पूरा प्लान
विशेषज्ञों ने बताया कि मथुरा-वृंदावन की कई सड़कें और अंडरपास 100 साल से अधिक पुराने हैं जो भारी वाहनों के लिए असुरक्षित हैं. शहर में पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ भी नहीं है.
भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा का कायाकल्प करने की बिसात बिछ चुकी है. अब मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं को जाम और प्रदूषण का सामना नहीं करना पड़ेगा. डीएम समेत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों को सुकून पहुंचाने का रोडमैप तैयार कर लिया है. इसके लिए मथुरा में ग्रीन मोबिलिटी जोन (GMZ) बनाया जाएगा.
कलेक्ट्रेट सभागार में राहगीरी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला बैठक में जीएमजेड की शुरुआत को लेकर डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि यह योजना केवल सुधार की नहीं बल्कि ब्रज की आध्यात्मिक शांति और पर्यावरणीय पवित्रता को लौटाने की दिशा में बड़ा कदम है.
जिलाधिकारी ने कहा कि श्रद्धालु यहां शांति और सुकून के लिए आते हैं लेकिन भीड़ और प्रदूषण के कारण उनका अनुभव प्रभावित होता है. GMZ से यह स्थिति बदलेगी. अधिकारियों ने मथुरा-वृंदावन को स्वच्छ, सुविधाजनक और जाम-मुक्त बनाने की कार्ययोजना पर चर्चा की. इस दौरान नगर आयुक्त जगप्रवेश ने बताया कि साल 2023 तक मथुरा में 50% इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए चार्जिंग स्टेशन, ई बसें और बेहतर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था विकसित की जाएगी. वहीं एसएसपी श्र्लोक कुमार ने कहा कि ट्रैफिक प्रबंधन और सख्त निगरानी से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
50 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों के कारण
बैठक में सेंटर फॉर साइंस एंट एनवायरनमेंट और आईसीसीटी के विशेषज्ञों ने बताया कि बड़े शहरों में 50% से अधिक प्रदूषण वाहनों के कारण होता है. इसी को देखते हुए मथुरा-वृंदावन में लो-एमिशन जोन लागू करने की तैयारी है जिससे शहर में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की एंट्री सीमित हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में मंदिरों और घाटों के आसपास अव्यवस्थित पार्किंग और निजी वाहनों की अधिक संख्या के कारण श्रद्धालुओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
बांके बिहारी, प्रेम मंदिर और प्रमुख घाटों तक पैदल पहुंचना भी काफी जोखिम भरा हो गया है. GMZ योजना के तहत शहर के बाहर बनाए जाने वाले पार्किंग स्थलों से मंदिरों और होटलों तक ई-रिक्शा और धार्मिक बस सेवा चलाई जाएगी ताकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को सहूलियत मिल सके.
कई सड़कें और अंडरपास असुरक्षित
विशेषज्ञों ने बताया कि मथुरा-वृंदावन की कई सड़कें और अंडरपास 100 साल से अधिक पुराने हैं जो भारी वाहनों के लिए असुरक्षित हैं. शहर में पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ भी नहीं है. GMZ के तहत फुटपाथों को अतिक्रमण मुख्त कर छायादार और सुरक्षित बनाया जाएगा.