अमेठी में बेटी की शादी की खुशियां मातम में बदल गई. शुक्रवार की वो रात, बेटी की शादी, पूरा परिवार खुखियों से झूम रहा था. बैंड पर बाराती दूल्हे के साथ नाच-गा रहे थे. द्वारपूजा और जयमाल की तैयारियां चल रही थी. उसी समय पंडित ने पिता से फल मांगे. पिता देखा तो फल नहीं थे. ऐसे में पिता गौतम कुमार ने अपने रिश्ते के भाई आशाराम को बुलाया. दोनों लोग बाइक पर बैठकर फल लेने निकल गए. उसके बाद खबर आई कि पापा-चाचा नहीं रहे. श्रृंगार से सजी बेटी का दिल धड़कना बंद हो गया, मानो उसके भी प्राण निकल गए.
अमेठी के जगदीशपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात को गौतम कुमार की बड़ी बेटी मनीषा की शादी हो रही थी. बारात घर पहुंच चुकी थी. द्वारपूजा की तैयारी चल रही थी. इसी दौरान पंडित ने पूजा के लिए फल मांगे. घर में फल नहीं थे. गौतम कुमार और आशाराम के साथ बाइक से बाजार निकल गए. दोनों घर से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि सामने से आ रही दूसरी बाइक से जोरदार टक्कर हो गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए.
स्थानीय लोगों ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया. डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन हालत ज्यादा गंभीर होने के कारण गौतम कुमार और आशाराम को बचाया नहीं जा सका. दूसरी बाइक पर सवार युवक बब्लू उर्फ विजय गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे की सूचना जैसे ही घर पहुंची. वहां अफरा-तफरी मच गई. दुल्हन मनीषा पिता की मौत की खबर सुनकर बेहोश हो गई. रिश्तेदारों और गांव वालों की आंखें नम हो गई शादी की रस्में जल्दबाजी और बेहद सादगी के साथ पूरी करानी पड़ीं.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
गौतम कुमार परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. वह ड्राइवरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे. उनके परिवार में पत्नी, सात बेटियां और एक बेटा है. बड़ी बेटी की शादी के दिन ही उनकी मौत ने पूरे परिवार को असहाय कर दिया. पत्नी मंजीता रोते हुए कहती रहीं कि अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा. वहीं आशाराम के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. उनके पांच बच्चे हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर बताई जा रही है.