UP SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, किन 10 जिलों में कटे सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम?
राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा 30.04 फीसदी वोट कटे हैं. पहले यहां 39,94,535 मतदाता थे, जो अब घटकर 27,94,397 रह गए हैं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी. नई सूची के अनुसार, राज्य में करीब 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. अब यूपी में कुल मतदाताओं की संख्या 12 करोड़ 55 लाख रह गई हैं. राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा वोटरों के नाम कटे हैं. यहां करीब 30 प्रतिशत मतदाता कम हुए हैं.
इन 10 जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे (प्रतिशत के हिसाब से)
1. लखनऊ- यहां सबसे ज्यादा 30.04 फीसदी वोट कटे हैं. पहले यहां 39,94,535 मतदाता थे, जो अब घटकर 27,94,397 रह गए हैं. 1,28,242 मतदाताओं की मौत हो चुकी है, 4,27,705 वोटर अपने पते पर नहीं मिले हैं, 5,35,855 वोटर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, जबकि 49,046 नाम डुप्लीकेट पाए गए.
2. गाजियाबाद- यहां 28.83 फीसदी वोट कम हुए हैं. मतदाताओं की संख्या 28,37,991 से घटकर 20,19,852 रह गई है.
3. बलरामपुर- यहां 25.98 फीसदी वोटरों के नाम कटे हैं. इस जिले में पहले 15,82,027 मतदाता थे, अब 11,71,827 बचे हैं.
4. कानपुर नगर- यहां 25.50 फीसदी वोट घटे हैं. मतदाता संख्या 35,38,261 से घटकर 26,36,113 हो गई है.
5. मेरठ- पश्चिमी यूपी के इस जिले में 24.65 फीसदी वोट कम हुए हैं. पहले 26,99,820 वोटर थे, अब 20,34,185 रह गए हैं.
6. प्रयागराज- यहां 24.64 फीसदी मतदाता घटे हैं. संख्या 46,92,860 से घटकर 35,36,555 रह गई है.
7. गौतम बुद्ध नगर- यहां 23.98 फीसदी वोट कम हुए हैं.
8. आगरा- इस जिले में 23.25 फीसदी मतदाता घटे हैं.
9. हापुड़- यहां 22.30 फीसदी वोट कम हुए हैं.
10. शाहजहांपुर- यहां 21.76 फीसदी वोटरों के नाम हटे हैं.
SIR से पहले 15 करोड़ से ज्यादा नाम दर्ज थे
SIR से पहले उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग 15 करोड़ 44 लाख मतदाता थे. अब नए पुनरीक्षण के बाद यह संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है. इससे पहले वर्ष 2003 में आखिरी बार ऐसा गहन पुनरीक्षण किया गया था. उस समय के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं.
नाम घटने की मुख्य वजह
करीब 46 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है (लगभग 3%)
लगभग 79.5 लाख वोटर अपने दर्ज पते पर नहीं मिले (करीब 5%)
करीब 1 करोड़ 29 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं (लगभग 8.4%)
पहले से पंजीकृत मतदाता करीब 25 लाख हैं
अन्य कारणों से लगभग 7.7 लाख नाम हटे हैं
SIR क्यों जरूरी था
चुनाव आयोग का कहना है कि हर साल होने वाले छोटे सुधारों से पुरानी गलतियों को ठीक करना संभव नहीं था. पिछले 20 सालों में मतदाता सूचियों में कई तरह की गड़बड़ियां हो गई थी. जिनमें मृत लोगों के नाम, दूसरे राज्य या जिले में स्थायी रूप से चले गए वोटर और एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होना शामिल है.इन समस्याओं को दूर करने के लिए घर-घर जाकर बूथ स्तर पर जांच जरूरी थी, इसलिए SIR प्रक्रिया शुरू की गई.