ट्रस्ट और मुख्य साजिशकर्ता टिन्नू यादव की छवि बचाने के लिए दबाई गई चंदा चोरी की खबर
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी (SIT) ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसमें ट्रस्ट की छवि बचाने के लिए मामले को दबाने और टिन्नू यादव पर अत्यधिक निर्भरता को मुख्य वजह बताया गया है.
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के सनसनीखेज आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है. सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की समय-सीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है और उच्च अधिकारियों से अंतिम मंजूरी मिलते ही इसे प्रस्तुत कर दिया जाएगा. इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में न केवल सीधे तौर पर चोरी में शामिल आरोपियों के नामों का खुलासा होने की उम्मीद है, बल्कि उन अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा किया जाएगा जिनकी घोर लापरवाही के कारण इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया.
नियमों की अनदेखी और लापरवाही का खुलासा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मंदिर के चढ़ावे की चोरी इसलिए संभव हो सकी क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट और संबंधित बैंक के बीच हुए समझौते के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि चोरी की भनक लगने के बाद भी एक लंबे समय तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राम मंदिर ट्रस्ट की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के डर से इस संवेदनशील मामले को अंदर ही अंदर दबाने और छुपाने के पुरजोर प्रयास किए गए थे.
मुख्य साजिशकर्ता टिन्नू यादव पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घोटाले में एसआईटी ने टिन्नू यादव नामक व्यक्ति की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रबंधन द्वारा टिन्नू यादव पर अत्यधिक और अंधाधुंध भरोसा किया गया, जिसने उसे बिना किसी रोक-टोक के इस हेराफेरी को जारी रखने का अवसर दिया. एसआईटी ने अपनी छापेमारी और तफ्तीश के दौरान टिन्नू यादव और उसके सह-आरोपियों के पास से चोरी की गई बड़ी नकद राशि भी बरामद की है. यह अत्यधिक निर्भरता ही इस पूरे सुरक्षा तंत्र की विफलता का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है.
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सीसीटीवी को चकमा देकर संगठित तरीके से चोरी
एसआईटी द्वारा पूर्व में आरोपियों से की गई पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि यह पूरी चोरी एक बेहद संगठित गिरोह की तरह की जा रही थी. जांचकर्ताओं को पता चला है कि आरोपियों के बीच पहले से ही काम बंटे हुए थे; जैसे किस व्यक्ति को दान पेटी से नकद निकालना है और किसे सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े होकर फुटेज को ब्लॉक करना है. जांच के दौरान खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज से भी इन दावों की पुष्टि हुई है, जिसमें कुछ संदिग्ध नकदी गिनते समय चालाकी से नोटों को छिपाते हुए साफ देखे गए हैं.