ICC का बड़ा ऐलान, ODI और T20 वर्ल्ड कप का पूरा फॉर्मेट बदला; IPL-स्टाइल एलिमिनेटर की एंट्री
आईसीसी ने 2027 वनडे और 2028 टी20 विश्व कप के प्रारूप में बड़े बदलाव किए हैं. नए सिस्टम में सुपर सीरीज, सुपर 7, सुपर 10 और एलिमिनेटर शामिल होंगे, जिससे हर मुकाबला पहले से ज्यादा अहम बन जाएगा.
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने आने वाले वनडे और टी20 विश्व कप के प्रारूप में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है. नए मॉडल का उद्देश्य टूर्नामेंट को अधिक रोमांचक बनाना और हर मैच का महत्व बढ़ाना है. 2027 से वनडे विश्व कप और 2028 से टी20 विश्व कप नए नियमों के तहत खेले जाएंगे. आईसीसी का मानना है कि इससे कमजोर और मजबूत टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जबकि बेअसर मुकाबलों की संख्या भी कम होगी.
2027 वनडे विश्व कप में 14 टीमें खेलेंगी, लेकिन सभी टीमें सीधे मुख्य चरण में नहीं पहुंचेंगी. सबसे निचली रैंकिंग वाली तीन टीमें पहले सुपर सीरीज खेलेंगी. इस राउंड में केवल शीर्ष टीम ही आगे बढ़ेगी, जबकि बाकी दो टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा. इसके बाद 12 टीमें मुख्य ग्रुप चरण में प्रवेश करेंगी.
ग्रुप स्टेज और सुपर 7 का नया फॉर्मेट
मुख्य दौर में 12 टीमों को छह-छह के दो समूहों में बांटा जाएगा. हर समूह की शीर्ष तीन टीमें सीधे अगले चरण में पहुंचेंगी. सातवां स्थान दोनों समूहों के प्रदर्शन के आधार पर तय होगा. इसके बाद सातों टीमें एक संयुक्त सुपर 7 लीग खेलेंगी. इस चरण में शीर्ष चार टीमें ही सेमीफाइनल का टिकट हासिल करेंगी.
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टी20 विश्व कप में सुपर 10 की एंट्री
2028 टी20 विश्व कप में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन ग्रुप चरण का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा. पहले चार समूहों की जगह अब पांच समूह होंगे और हर समूह में चार टीमें रहेंगी. प्रत्येक समूह की शीर्ष दो टीमें सुपर 10 चरण में पहुंचेंगी. इससे शुरुआती दौर के मुकाबले पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाएंगे.
एलिमिनेटर मुकाबलों से बढ़ेगा रोमांच
सुपर 10 चरण में दोनों समूहों की शीर्ष टीम सीधे सेमीफाइनल में पहुंचेगी. वहीं दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमें क्रॉसओवर एलिमिनेटर मुकाबले खेलेंगी. इन मुकाबलों के विजेता बाकी दो सेमीफाइनल स्थान हासिल करेंगे. इससे हर मैच का दबाव और रोमांच दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
हर मुकाबला होगा निर्णायक
आईसीसी का मानना है कि नए प्रारूप से टूर्नामेंट में औपचारिक या बेअसर मुकाबलों की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी. शुरुआती चरण से लेकर नॉकआउट तक हर जीत और हर हार का असर आगे की राह तय करेगा. नए ढांचे का मकसद प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ उभरती टीमों को भी बड़े मंच पर अधिक अवसर देना है.