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India Daily

‘अंदर रुकता तो मौत तय थी’, लखनऊ अग्निकांड से बच निकले युवक ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

लखनऊ अग्निकांड में जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाने वाले मोहम्मद आसिफ ने हादसे की भयावह आपबीती साझा की. उन्होंने बताया कि धुएं और आग के बीच उनके पास बचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
‘अंदर रुकता तो मौत तय थी’, लखनऊ अग्निकांड से बच निकले युवक ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
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लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. इस हादसे के दौरान जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाने वाले मोहम्मद आसिफ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था. अब उन्होंने उस भयावह घटना के बारे में विस्तार से बताया है. आसिफ के अनुसार, कुछ ही मिनटों में हालात इतने खराब हो गए थे कि सांस लेना मुश्किल हो गया था और बाहर निकलने का रास्ता भी लगभग बंद हो चुका था. ऐसे में उन्हें अपनी जान बचाने के लिए जोखिम भरा फैसला लेना पड़ा.

 दोपहर का सामान्य दिन अचानक बन गया भयावह

आशियाना निवासी 32 वर्षीय मोहम्मद आसिफ एक एनीमेशन सेंटर में कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर करीब दो बजे वह अपने सहकर्मियों के साथ भोजन कर रहे थे. तभी अचानक सूचना मिली कि सभी को तुरंत बाहर निकलना चाहिए. शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर है. लोगों को लगा कि शायद कोई तकनीकी समस्या या मामूली शॉर्ट सर्किट हुआ होगा. लेकिन कुछ ही देर में हालात तेजी से बिगड़ने लगे. कर्मचारियों ने बाहर निकलने का प्रयास किया, मगर धुआं फैलने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई.

 बायोमेट्रिक दरवाजा बना बड़ी परेशानी

आसिफ ने बताया कि इमारत से बाहर निकलने के लिए बायोमेट्रिक लॉक वाला दरवाजा था. बिजली बाधित होने के कारण वह ठीक से काम नहीं कर रहा था. काफी कोशिशों के बाद दरवाजा खुला, लेकिन तब तक पूरे फ्लोर में घना धुआं भर चुका था. सीढ़ियां, जो बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता थीं, धुएं और आग की चपेट में आ चुकी थीं. कुछ ही मिनटों में दृश्यता इतनी कम हो गई कि पास खड़े लोग भी एक-दूसरे को नहीं देख पा रहे थे. इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच घबराहट और बढ़ा दी.

 खिड़की तोड़कर बनाई उम्मीद की राह

जब सांस लेना मुश्किल होने लगा तो आसिफ ने खुद को बचाने के लिए एक अलग रास्ता तलाशने का निर्णय लिया. उन्होंने एक मेज उठाकर कांच की खिड़की तोड़ी और चेहरे पर गीला तौलिया बांधकर धुएं से बचने की कोशिश की. खिड़की टूटने के बाद उन्हें बाहर की स्थिति दिखाई दी, लेकिन वहां भी आग की लपटें मौजूद थीं. नीचे खड़े लोग उन्हें बाहर निकलने के लिए आवाज दे रहे थे. उस समय उन्हें महसूस हुआ कि इमारत के भीतर रहना कहीं अधिक खतरनाक है. यही सोचकर उन्होंने छलांग लगाने का साहसिक फैसला किया.

छलांग के बाद बची जान, लेकिन दर्दनाक यादें कायम

आसिफ ने बताया कि नीचे बिजली के तार भी मौजूद थे और उन्हें यह नहीं पता था कि उनमें करंट है या नहीं. आग की गर्मी से तार पिघल रहे थे और छलांग लगाने के दौरान उन्हें चोटें भी आईं. हालांकि वह किसी तरह सुरक्षित बच निकले. उनके अनुसार, उनके बाद भी कई लोगों ने जान बचाने के लिए छलांग लगाई, लेकिन तब तक आग और धुआं तेजी से दूसरी मंजिल तक फैल चुका था. कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके. यह हादसा उनके लिए एक ऐसी याद बन गया है जिसे वह शायद कभी भूल नहीं पाएंगे.