1999 का मामला, 2026 में फैसला; बागपत में 80 साल के बुजुर्ग को रिहाई से पहले मिली अनोखी सजा

80 वर्षीय राजेंद्र सिंह को 27 साल और 100 से अधिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने बरी किया. प्रतीकात्मक सजा और 1000 रुपये जुर्माना लगाया गया.

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Reepu Kumari

बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो न्याय व्यवस्था पर गहरी सोच के लिए मजबूर करता है. 80 वर्षीय राजेंद्र सिंह को 27 साल और 100 से अधिक सुनवाइयों के बाद अदालत ने बरी कर दिया. हालांकि कोर्टरूम में 24 घंटे खड़े रहने की प्रतीकात्मक सजा और 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. यह यूपी न्यूज देशभर में चर्चा का विषय बन गई है.

1999 में दर्ज हुई थी एफआईआर, तब से शुरू हुई लंबी लड़ाई

उत्तर प्रदेश समाचार के अनुसार यह पूरा मामला 26 जून 1999 का है. बागपत के सरूरपुर कलां गांव के धारा सिंह ने अपने साथी ग्रामीण राजेंद्र सिंह और दो अन्य के खिलाफ आपराधिक धमकी की एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता का आरोप था कि विवाद के दौरान राजेंद्र सिंह ने उन्हें गाली दी और जान से मारने की धमकी दी. आरोप पत्र दाखिल होने के बाद राजेंद्र सिंह का मामला अन्य आरोपियों से अलग कर दिया गया और उनका मुकदमा एक साल बाद अलग से शुरू हुआ.

तीन दशक तक हर सुनवाई में पहुंचते रहे राजेंद्र सिंह

बागपत पुलिस के रिकॉर्ड और अदालती दस्तावेजों के अनुसार राजेंद्र सिंह ने लगभग तीन दशकों तक हर सुनवाई में निष्ठापूर्वक भाग लिया. लेकिन बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण जब वे एक बार अदालत में पेश नहीं हो सके तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया. साथ ही उनकी संपत्तियां जब्त करने का आदेश भी दिया गया. यह वह मोड़ था जब बुजुर्ग ने अपना अपराध स्वीकार कर नरमी की गुहार लगाई.


कोर्ट ने दिखाई संवेदनशीलता, प्रतीकात्मक सजा से किया बरी

मुख्य न्यायाधीश मनिंद्रपाल सिंह ने राजेंद्र सिंह की वृद्धावस्था और दुर्बल स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील फैसला सुनाया. अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा के बजाय कोर्टरूम में 24 घंटे प्रतीकात्मक रूप से खड़े रहने और 1000 रुपये जुर्माना भरने की सजा दी. यह फैसला न्यायिक मानवीयता की एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है और उत्तर प्रदेश समाचार में इसे व्यापक सराहना मिल रही है.

राजेंद्र सिंह बोले-परिवार के लिए बड़ी राहत है यह फैसला

फैसले के बाद कोर्टरूम से बाहर निकले 80 वर्षीय राजेंद्र सिंह की आंखों में राहत के आंसू थे. उन्होंने कहा कि वे 80 साल के हैं और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं. हर साल के साथ अदालत आना और सुनवाई में उपस्थित होना और कठिन होता जा रहा था. उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला उनके और उनके पूरे परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत है.