39 साल वायुसेना में सेवा, 3 हजार घंटे उड़ान... अब राम मंदिर के CEO; जानिए जीतेंद्र मिश्रा के बारे में सब कुछ
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर का पहला CEO बनाया गया है. 39 साल वायुसेना में सेवा देने वाले मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे.
Jitendra Mishra Life Story: राम मंदिर के बढ़ते कामकाज को संभालने के लिए पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. 39 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने के बाद अप्रैल 2026 में रिटायर हुए मिश्रा अब मंदिर के प्रशासन, सुरक्षा और दूसरे बड़े कामों की देखरेख करेंगे.
जीतेंद्र मिश्रा ही राम मंदिर के CEO क्यों बने?
जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा है. वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे और इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले मिश्रा का यूपी से भी सीधा जुड़ाव है. राम मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और बड़े स्तर के प्रशासनिक काम को देखते हुए उनका लंबा अनुभव अहम माना जा रहा है. उन्होंने वायुसेना में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. उनकी पत्नी सरिता सिंह एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रह चुकी हैं. उनका एक बेटा और एक बेटी है. उनके पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉमर्स के प्रोफेसर थे.
जीतेंद्र मिश्रा को कितनी सैलरी मिलेगी?
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए जारी सूचना में वेतन की कोई तय रकम नहीं बताई गई थी. इसमें कहा गया था कि चुने गए अधिकारी की सैलरी और भत्ते आपसी सहमति से तय होंगे. अधिकारी के अनुभव, योग्यता और पिछली जिम्मेदारियों को देखते हुए वेतन तय किया जाएगा. मिश्रा को तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर यह जिम्मेदारी दी गई है. इस दौरान उन्हें रहने के लिए घर, सरकारी वाहन, सुरक्षा और दूसरी जरूरी सुविधाएं ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी. उनकी भूमिका केवल दफ्तर के प्रशासन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि मंदिर से जुड़े बड़े स्तर के कामकाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी. राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए व्यवस्था बनाए रखना CEO की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगा.
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जीतेंद्र मिश्रा की बहादुरी के 3 किस्से
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जीतेंद्र मिश्रा की भूमिका काफी अहम रही. हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने उस समय की कई बातें साझा की थी. उनके मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान एक अधिकारी ने उन्हें दफ्तर की लाइट बंद करने की सलाह दी थी, क्योंकि दुश्मन वहां की लोकेशन पकड़ सकता था. मिश्रा ने इसके जवाब में कहा कि जिसे हिम्मत है, वह निशाना लगाकर देखे. एक दूसरे मामले में एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब 314 किलोमीटर दूर एक बड़े लक्ष्य को पकड़ा. जानकारी मिलने पर मिश्रा ने कंट्रोल रूम से सिर्फ ‘शूट’ का आदेश दिया. इसके बाद S-400 सिस्टम से हमला किया गया. उनके मुताबिक, ऑपरेशन का मकसद केवल पाकिस्तानी विमानों को रोकना नहीं था, बल्कि वहां की निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था को कमजोर करना भी था. उन्होंने दावा किया कि 15 से 17 मिनट के भीतर AEW&C सिस्टम और छह बड़े रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया.
6 दिसंबर 1986 को लड़ाकू विमान के पायलट ऑफिसर बने
जीतेंद्र मिश्रा को बचपन से ही विमान उड़ाने में दिलचस्पी थी. उन्होंने पुणे की रक्षा अकादमी के साथ एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, एयर यूनिवर्सिटी और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में पढ़ाई की. 6 दिसंबर 1986 को उन्हें असम के तेजपुर में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला. इसके बाद उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया. वह मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरफोर्स टेस्ट पायलट स्कूल में इंस्ट्रक्टर और पठानकोट व बरेली जैसे अहम एयरबेस की कमान संभाल चुके हैं. उन्होंने एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (ऑपरेशन) की जिम्मेदारी भी निभाई। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है. 30 अप्रैल 2026 को रिटायर होने के बाद अब उन्हें राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी मिली है.
फ्रांस में हवाई अभ्यास गरुड़ के लिए भारतीय टीम को लीड किया
जीतेंद्र मिश्रा के करियर में विदेशी सैन्य अभ्यास भी अहम हिस्सा रहे हैं. जून 2010 में उन्होंने फ्रांस में हुए हवाई अभ्यास ‘गरुड़’ में भारतीय वायुसेना की टीम का नेतृत्व किया था. वह पुणे में सुखोई-30 MKI ऑपरेटिंग एयरबेस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर भी रह चुके हैं. अपने लंबे करियर में उन्होंने 18 से अधिक तरह के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाए. अगस्त 2026 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कई जानकारियां साझा की थी. उनके मुताबिक, S-400 की क्षमता के कारण पाकिस्तानी विमान भारतीय सीमा से काफी दूरी पर रहे. उन्होंने यह भी बताया था कि पाकिस्तान ने भारतीय एयर डिफेंस की जानकारी हासिल करने के लिए स्लीपर सेल तक सक्रिय करने की कोशिश की थी. उनके अनुभव को देखते हुए राम मंदिर प्रशासन में भी उनकी योजना बनाने और बड़े स्तर पर व्यवस्था संभालने की क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है.