कोई भी विकास प्राधिकरण अब अस्थायी पूर्णता या अधिभोग प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकेंगे. रेरा ऐसे मामलों को लेकर सख्त है. रेरा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी परियोजना का अस्थायी पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी करने से परहेज करें. ऐसे अस्थायी प्रमाण-पत्र नियमानुकूल नहीं हैं तथा आवंटियों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इससे रजिस्ट्री या कब्जे के समय ग्राहकों को आशंका हो रही थी, ऐसे में रेरा ने इससे बचने को कह दिया है.
रेरा ने कहा है कि प्राधिकरण द्वारा जारी किए जाने वाले परियोजना के आंशिक पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्र में उन टावर्स या ब्लॉक्स के नाम अनिवार्य रूप से अंकित किए जाएं, जिनके संबंध में प्रश्नगत आंशिक पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है. इसके साथ ही परियोजना या उसके किसी चरण में सम्मिलित सभी टावर्स या ब्लॉक्स के नाम भी अनिवार्य रूप से अंकित किए जाएं. रेरा ने बताया कि यह देखा जा रहा था कि सक्षम प्राधिकरणों द्वारा जारी आंशिक पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्र में अंकित विवरण प्रमोटर द्वारा परियोजना के पंजीकरण के समय रेरा में दिए गए परियोजना या उसके टावर या ब्लॉक के नाम या आवंटी के साथ निष्पादित अनुबन्ध (बी.बी.ए.) में दिए गए नामों के अनुरूप नहीं थे. इस प्रकार के आंशिक पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्रों से आवंटी के मन में रजिस्ट्री तथा कब्जे के समय इकाई तथा टावर की पूर्णता को ले कर अनावश्यक संदेह उत्पन्न होते हैं।
रेरा ने स्पष्ट किया गया है कि नियमों तथा विधियों में इस प्रकार के अस्थायी प्रमाण-पत्रों की अनुमन्यता नहीं है और इस तरह के अस्थायी पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्र ऐेसे आवंटियों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं. जिनके द्वारा ऐसे प्रमाण-पत्रों के आधार पर रजिस्ट्री करा ली जाती है और कब्जा प्राप्त कर लिया जाता है, परन्तु सक्षम प्राधिकरणों द्वारा बाद में प्रश्नगत अस्थायी प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया जाता है.
संजय भूसरेड्डी, अध्यक्ष उ.प्र. रेरा ने कहा कि आवंटियों के हितों के संरक्षण तथा प्रोमोटर्स एवं आवंटियों के बीच विवादों को कम करने के लिए रियल इस्टेट सेक्टर में मानकीकरण हेतु लगातार प्रयासरत है. प्राधिकरणों द्वारा जारी आंशिक पूर्णता या अधिभोग प्रमाण-पत्रों में परियोजना, उसके टावर्स या ब्लॉकस के नाम प्रोमोटर द्वारा उ.प्र. रेरा में पंजीकृत कराई गई परियोजना में दिए गए नामों से भिन्न होते हैं , जिससे आवंटियों के मन में सम्बन्धित प्रमाण-पत्र को ले कर संशय बना रहता है. उन्होंने प्राधिकरणों को सलाह देते हुए कहा कि सक्षम प्राधिकरणों के स्तर पर थोड़ी सी अतिरिक्त सतर्कता बरतने से इस समस्या का समाधान बहुत आसानी से हो सकता है, जो हितधारकों के लिए अत्यन्त लाभकारी होगा.