UP: BSA ऑफिस में एंटी करप्शन का छापा, स्कूल मान्यता के नाम पर 10 हजार घूस लेते बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार
आजमगढ़ के बीएसए कार्यालय में मान्यता दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का मामला उजागर हुआ है. एंटी करप्शन टीम ने एक कनिष्ठ लिपिक को 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा.
आजमगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला सामने आया है. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में स्कूल की मान्यता दिलाने के बदले रिश्वत मांगे जाने की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई की. छापेमारी के दौरान एक कर्मचारी गिरफ्तार हुआ. वहीं दूसरा मौके से फरार हो गया.
मान्यता के नाम पर चल रहा था रिश्वत का खेल
जीयनपुर क्षेत्र के भरौली गांव निवासी चंद्रशेखर शर्मा ने आरोप लगाया कि उनके विद्यालय की मान्यता प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों ने उनसे 65 हजार रुपये की मांग की थी. शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी एंटी करप्शन यूनिट को दी. जांच के बाद टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की. तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता को विशेष रसायन लगे नोट दिए गए. जैसे ही बीएसए कार्यालय में रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 10 हजार रुपये दिए गए, टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी.
कनिष्ठ लिपिक गिरफ्तार
एंटी करप्शन टीम ने कनिष्ठ लिपिक आकाश यादव को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया. गिरफ्तारी के दौरान कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई. वहीं मामले में नामजद दूसरे कर्मचारी धर्मेंद्र कुमार राय उर्फ बबलू राय मौके से निकलने में सफल रहा. टीम ने उसकी तलाश शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि फरार कर्मचारी की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है. जल्द ही उसे हिरासत में लिया जाएगा.
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पहले भी विवादों में रह चुका है नाम
धर्मेंद्र कुमार राय का नाम पहले भी चर्चाओं में आ चुका है. वर्ष 2022 में शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े अनियमितता प्रकरण में उसका नाम सामने आया था. उस दौरान प्रशासन ने कई लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी. बताया जा रहा है कि वह पहले डीआईओएस कार्यालय में तैनात था और बाद में बीएसए कार्यालय से संबद्ध किया गया. इसके बावजूद उसके खिलाफ समय-समय पर शिकायतें मिलती रहीं.
कार्रवाई के बाद विभाग में बढ़ी हलचल
एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई ह. बीएसए कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों की मान्यता और अन्य प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है.