भारत-नेपाल सीमा पर स्लीपर सेल का खुलासा, ट्रेवल एजेंसी संचालक गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार तीन आरोपी ट्रेवल एजेंसी के संचालक हैं. ये लोग नेपाल से भारत आने वाले लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षित घुसाने का काम करते थे. गिरफ्तार लोगों में पंजाब निवासी विक्रमजीत सिंह, अमेरिका निवासी मनवीर सिंह और पीलीभीत के जोगा सिंह मुख्य आरोपी हैं.
बहराइच: भारत-नेपाल सीमा पर चल रही एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है. ट्रेवल एजेंसी चलाने वाले कुछ लोग स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे थे. वे अवैध तरीके से लोगों को भारत में घुसाने में मदद करते थे. पुलिस और एसएसबी की सतर्कता से यह रैकेट पकड़ा गया.
भारत-नेपाल सीमा पर स्लीपर सेल का खुलासा
इस मामले में अमेरिकी नागरिक समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें पंजाब का विक्रमजीत सिंह भी शामिल है, जो अजनाला पुलिस स्टेशन हमले के मामले में वांछित था. पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है.
ट्रेवल एजेंसी संचालक गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार तीन आरोपी ट्रेवल एजेंसी के संचालक हैं. ये लोग नेपाल से भारत आने वाले लोगों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षित घुसाने का काम करते थे. गिरफ्तार लोगों में पंजाब निवासी विक्रमजीत सिंह, अमेरिका निवासी मनवीर सिंह और पीलीभीत के जोगा सिंह मुख्य आरोपी हैं. बाकी तीन में राहुल, सुरेश पाठक और दिलीप शामिल हैं.
विक्रमजीत सिंह पर 2023 में पंजाब के अजनाला थाने पर हमले का आरोप है. उस समय वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह और उनके समर्थकों को छुड़ाने के लिए थाने पर हमला किया गया था और आगजनी भी हुई थी. विक्रमजीत इस घटना के बाद फरार था.
जोगा सिंह विक्रमजीत को काठमांडू से भारत लाने-ले जाने और पीलीभीत में ठहराने की व्यवस्था करता था. चार दिन पहले विक्रमजीत अपने अमेरिकी दोस्त मनवीर सिंह और एक महिला के साथ इनोवा कार में नेपाल के जमुनहा बॉर्डर पर पहुंचा. वहां से राहुल इनोवा चला रहा था. इसके बाद सुरेश पाठक और दिलीप बाइक से उन्हें भारतीय सीमा में घुसाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन एसएसबी जवानों ने सभी को रंगे हाथ पकड़ लिया.
एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में ट्रेवल एजेंसियों पर नजर रखी जा रही है. उन्होंने कहा- 'हम सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं. सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि ऐसे तत्वों पर लगाम लग सके.' पुलिस का मानना है कि ये ट्रेवल एजेंसी संचालक लंबे समय से स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे थे. वे न सिर्फ अवैध घुसपैठ में मदद करते थे बल्कि वांछित लोगों को भी छिपाने का काम करते थे. अब सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं.