इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर अहम सुनवाई की गई है. नाबालिगों से जुड़े एक मामले में दर्ज एफआईआर के बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचाव के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. साथ ही स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश आने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. अदालत ने स्वामी को जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है.
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. न्यायालय ने कहा कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करना आवश्यक है, इसलिए आदेश सुरक्षित रखा जा रहा है. जज ने संकेत दिया कि निर्णय में अनावश्यक देरी नहीं होगी और जल्द ही अंतिम आदेश जारी किया जाएगा. तब तक स्वामी की गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी.
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें. अदालत का मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए सभी पक्षों का सहयोग जरूरी है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों ने भरोसा दिलाया कि वे जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित होंगे और पूछे गए सवालों का जवाब देंगे.
यह मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है. आरोप है कि नाबालिगों से जुड़े गंभीर अपराध की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई है. बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोप निराधार हैं और तथ्यों से मेल नहीं खाते. उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की.
सुनवाई के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. उन्होंने दावा किया कि जिन बच्चों का जिक्र हो रहा है, वे संबंधित संस्थान में पढ़ते ही नहीं थे. फिलहाल सभी की नजर हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर है, जो इस मामले की आगे की दिशा तय करेगा.