लखनऊ में स्वाइन फ्लू से पहली मौत के बाद अलर्ट, एक महीने में 3 संक्रमित; जानें लक्षण और बचाव

लखनऊ में इस मौसम में स्वाइन फ्लू से पहली मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है. जनवरी से अब तक 13 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है. अधिकारियों ने लोगों से सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी जैसे लक्षणों को हल्के में न लेने की अपील की है.

ANI
Shanu Sharma

लखनऊ में स्वाइन फ्लू से इस मौसम की पहली मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला का बलरामपुर अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उसकी मौत हो गई. घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा है.

डॉक्टर के मुताबिक स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं. सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. खासतौर पर सांस लेने में परेशानी या सांस फूलने जैसी स्थिति गंभीर संकेत हो सकती है.

अस्पतालों में अलग वार्ड और जांच की व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू के मरीजों की जांच और इलाज के लिए अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं. सिविल अस्पताल में 12 और बलरामपुर अस्पताल में छह बिस्तरों का अलग वार्ड तैयार किया गया है. गंभीर मरीजों के उपचार के लिए जरूरी दवाओं और जांच की व्यवस्था भी की गई है. 


जनवरी से अब तक 13 मामले सामने आए

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अब तक लखनऊ में 13 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है. इनमें से तीन मामले पिछले एक महीने के दौरान सामने आए हैं. अधिकांश मरीजों ने सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों के बाद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर से संपर्क किया था. 

महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटा रही है. टीम यह पता लगाएगी कि महिला हाल में किन स्थानों पर गई थी और किन लोगों के संपर्क में आई थी. परिवार के अन्य सदस्यों को फिलहाल सावधानी बरतने और अलग रहने की सलाह दी गई है. जरूरत के अनुसार संपर्क में आए लोगों की निगरानी भी की जा सकती है.

 इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

स्वाइन फ्लू को इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) संक्रमण भी कहा जाता है. इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, अत्यधिक कमजोरी और थकान शामिल हैं. सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना गंभीर संकेत हो सकते हैं. गंभीर मामलों में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो सकता है.

खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकना, साबुन से बार-बार हाथ धोना और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना जरूरी है. लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. इस्तेमाल किए गए रुमाल और टिश्यू को सुरक्षित तरीके से फेंकें. सांस लेने में परेशानी होने या हालत तेजी से बिगड़ने पर मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.