menu-icon
India Daily

माफिया अतीक का बेटा अबान, जिसकी एक्सीडेंट में हुई मौत, उसकी कार से मिलीं दो मशहूर किताबें

अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत के बाद कार से दो चर्चित अंग्रेजी किताबें मिलीं. वह इन्हें झांसी जेल में बंद भाई अली को देने जा रहा था.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
माफिया अतीक का बेटा अबान, जिसकी एक्सीडेंट में हुई मौत, उसकी कार से मिलीं दो मशहूर किताबें
Courtesy: X

माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत के बाद पुलिस जांच में उसकी कार से दो चर्चित अंग्रेजी किताबें बरामद हुई हैं. क्रेटा कार में मिली इन किताबों में फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की का प्रसिद्ध उपन्यास ‘द इडिएट’ और मार्जन कमाली की चर्चित किताब ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ शामिल हैं. बताया जा रहा है कि अबान इन्हें अपने जेल में बंद भाई अली को देने जा रहा था.

‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ की कहानी

मार्जन कमाली का उपन्यास ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ प्रेम, परिवार, बिछड़ने और ईरान के राजनीतिक इतिहास को एक साथ जोड़ता है. कहानी 1953 के ईरान की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है. इसमें रोया और बहमन नाम के दो युवा एक स्टेशनरी की दुकान में मिलते हैं और किताबों तथा रूमी की कविताओं के प्रति समान रुचि के कारण करीब आते हैं.

 राजनीतिक उथल-पुथल ने बदल दी प्रेम कहानी

उपन्यास में रोया और बहमन के रिश्ते के साथ ईरान की राजनीतिक परिस्थितियों को भी दिखाया गया है. बहमन तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेघ का समर्थक होता है. 1953 के राजनीतिक तख्तापलट के बाद दोनों की जिंदगी बदल जाती है और उनका रिश्ता टूट जाता है. इस तरह किताब व्यक्तिगत प्रेम के साथ सत्ता संघर्ष और आम लोगों पर राजनीति के प्रभाव को सामने रखती है.

‘द इडिएट’ में इंसानी स्वभाव की पड़ताल

दोस्तोयेव्स्की का ‘द इडिएट’ 1869 में प्रकाशित हुआ था. इसका मुख्य किरदार प्रिंस लेव मिश्किन बेहद दयालु, ईमानदार और मासूम व्यक्ति है. वह ऐसे समाज में लौटता है जहां पैसा, महत्वाकांक्षा और स्वार्थ रिश्तों को प्रभावित करते हैं. उसकी सरलता को लोग कमजोरी समझते हैं. उपन्यास प्रेम, ईर्ष्या, लालच, नैतिकता और इंसानी मानसिकता जैसे विषयों की गहरी पड़ताल करता है.

लेखक के जीवन से भी जुड़ा है उपन्यास

‘द इडिएट’ को दोस्तोयेव्स्की के जीवन के एक भयावह अनुभव से भी जोड़कर देखा जाता है. 1849 में उन्हें राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी. अंतिम क्षणों में सजा बदलकर साइबेरिया में कठोर श्रम में तब्दील कर दी गई. मौत के बेहद करीब पहुंचने का यह अनुभव उनके साहित्य पर गहरा प्रभाव डालने वाला माना जाता है.

झांसी जेल जाते समय हुआ था हादसा

अबान अहमद की 6 अगस्त की सुबह झांसी में सड़क हादसे में मौत हुई थी. वह प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने जा रहा था. कार में उसके चार दोस्त भी मौजूद थे. हाईवे पर करीब 10:30 बजे जानवर को बचाने के प्रयास में कार डिवाइडर से टकरा गई. हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हुए. कार से मिली किताबों ने इस हादसे की जांच के बीच लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.