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AAP उत्तर प्रदेश पदयात्रा : संजय सिंह के नेतृत्व में बेरोजगारी और जातीय अन्याय के खिलाफ जनसमर्थन

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बोलते हुए संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश को जातीय भेदभाव का केंद्र बताया. "दलितों, पिछड़ों और वंचितों के साथ मंदिर प्रवेश, शादियों और सार्वजनिक जगहों पर आज भी ये होता है. आरक्षण में धांधली और थाने-तहसील में न्याय की गुहार अनसुनी रहती है," उन्होंने जोर दिया. 

India daily
Hemraj Singh Chauhan

अयोध्या: आम आदमी पार्टी (AAP) की उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा शुरू की गई 'रोजगार दो - सामाजिक न्याय दो' पदयात्रा अपने दूसरे दिन भी जोरदार जनसमर्थन हासिल कर रही है. पार्टी के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के नेतृत्व में यह पदयात्रा बुधवार को अयोध्या से शुरू हुई थी, जो गुरुवार को चांदपुर, हरबंशपुर और धबासेमर गांवों से होते हुए कल्याण भदरसा पहुंची और अंत में बीकापुर में समाप्त हुई. 

इस दौरान हजारों स्थानीय लोग, AAP कार्यकर्ता और युवा पदयात्रा में शामिल होकर बेरोजगारी व जातीय भेदभाव के खिलाफ नारे लगा रहे थे.पदयात्रा के विभिन्न पड़ावों पर उत्साहपूर्ण स्वागत देखने को मिला. नहरिया चौकी पर अजीत सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों समर्थकों ने फूलमालाओं और तालियों से संजय सिंह व अन्य नेताओं का अभिनंदन किया. मसौदा में सागर शर्मा, रोडवेज वर्कशॉप के पास राम प्रताप यादव, भरतकुंड में अशोक कुमार गोंद, पिपरी जलालपुर में विनोद कुमार रावत और शाहगंज मोड़ पर आलोक द्विवेदी ने बड़ी संख्या में लोगों के साथ पदयात्रा को समर्थन दिया. 

कहां से कहां तक होगी पदयात्रा?

यह 13 दिवसीय यात्रा करीब 200 किलोमीटर लंबी है, जो अयोध्या से सुल्तानपुर व अमेठी होते हुए प्रयागराज में संपन्न होगी.संजय सिंह ने पदयात्रा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में बेरोजगारी की राजधानी बन चुका है. उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में सबसे ज्यादा युवा बेरोजगार हैं, सरकारी नौकरियां तो दूर, किसान, बुनकर और छोटे उद्योगों से जुड़े लोग भी आर्थिक तंगी का शिकार हैं. "फसल का सही मूल्य नहीं मिलता, खाद के लिए लंबी कतारें लगानी पड़ती हैं और कर्ज के बोझ तले किसान आत्महत्या कर रहे हैं. आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कर्मी, शिक्षा मित्र जैसे लोग वर्षों से नियमितीकरण की आस लगाए बैठे हैं," 

'उत्तर प्रदेश जातीय भेदभाव का केंद्र'

सिंह ने आगे कहा कि शिक्षा क्षेत्र में भी आरक्षण घोटाले और परीक्षाओं में अनियमितताएं आम हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है.सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बोलते हुए संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश को जातीय भेदभाव का केंद्र बताया. "दलितों, पिछड़ों और वंचितों के साथ मंदिर प्रवेश, शादियों और सार्वजनिक जगहों पर आज भी ये होता है. आरक्षण में धांधली और थाने-तहसील में न्याय की गुहार अनसुनी रहती है," उन्होंने जोर दिया. 

सिंह ने पदयात्रा को जनता की हक की लड़ाई करार देते हुए कहा कि यह कोई चुनावी स्टंट नहीं, बल्कि हर हाथ को काम और हर व्यक्ति को सम्मान दिलाने का संकल्प है.जनता से अपील करते हुए. AAP नेता ने कहा, "अब घरों में बैठने का समय नहीं. सड़कों पर उतरिए, इस पदयात्रा से जुड़िए और तानाशाही व्यवस्था को चुनौती दीजिए. जब तक अंतिम व्यक्ति को रोजगार और बराबरी नहीं मिलेगी, AAP का संघर्ष रुकेगा नहीं."

पदयात्रा में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं, जो राज्य में बदलाव की बयार का संकेत दे रहा है.यह यात्रा उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, जहां बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से कहीं ऊपर है और सामाजिक असमानता गहरी जड़ें जमा चुकी है. AAP का दावा है कि जनसमर्थन से यह मुहिम पूरे राज्य में लहर बन जाएगी.