वृंदावन में निकला चंदन से बना 60 फुट ऊंचा श्री रंगनाथ भगवान का भव्य रथ, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
उत्तर भारत में दक्षिणात्य शैली के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव के दौरान शुक्रवार को भगवान ठाकुर गोदा रंगमन्नार का भव्य रथोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ.
वृंदावन: उत्तर भारत में दक्षिणात्य शैली के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव के दौरान शुक्रवार को भगवान ठाकुर गोदा रंगमन्नार का भव्य रथोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ. लगभग पौने दो सौ वर्ष प्राचीन चंदन से निर्मित विशाल रथ में विराजमान ठाकुर जी के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. करीब 60 फीट ऊंचे इस दिव्य रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और हर कोई अपने आराध्य के रथ को खींचने के लिए आतुर दिखाई दिया.
ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान चंदन निर्मित विशालकाय रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले. वैदिक परंपरा के अनुसार प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ श्रीदेवी और भूदेवी के साथ अपने निज गर्भगृह से पालकी में विराजमान होकर मंदिर प्रांगण में पधारे. ज्योतिषीय गणना के अनुसार मीन लग्न में भगवान को दिव्य और आकर्षक रथ में विराजित कराया गया. जैसे ही भगवान रथ पर विराजमान हुए, मंदिर परिसर और आसपास का पूरा क्षेत्र “रंगनाथ भगवान की जय” के जयघोष से गूंज उठा.
वैदिक रीति-रिवाजों के साथ वेद मंत्रों का उच्चारण:
इस अवसर पर मंदिर के पुरोहित विजय किशोर मिश्र और गोविंद किशोर मिश्र ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए देव आह्वान, नवग्रह स्थापना और गणपति पूजन सहित विभिन्न देवताओं का पूजन वंदन किया. लगभग एक घंटे तक चली इस वैदिक पूजा के बाद जैसे ही सात कूपों का धमाका और काली के स्वर के साथ रथ के चलने का संकेत मिला, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच गया.
श्रद्धालुओं में रथ को खींचने की होड़:
रथ के चलने के साथ ही श्रद्धालुओं में रथ को खींचने की होड़ लग गई. लगभग 15 फुट चौड़े, 20 फुट लंबे और 60 फुट ऊंचे इस भव्य रथ की छवि देखते ही बनती थी. रथ को चार श्वेत घोड़े “उच्चश्रेवा” के प्रतीक स्वरूप सजाए गए थे, जिनकी लगाम पार्षद थामे हुए थे. रथ पर मुख्य पार्षद जय-विजय, दिग्पाल और विश्वकसेन सहित विभिन्न देवताओं की आकृतियों से सजावट की गई थी. इसके साथ ही रथ को रंग-बिरंगी पताकाओं, देशी-विदेशी सुगंधित पुष्पों, केले के तनों और हरे पत्तों से सजाया गया था, जो इसकी दिव्यता और आकर्षण को और बढ़ा रहे थे.
रथ ने तय की लगभग सात सौ गज की दूरी:
करीब तीन घंटे की यात्रा के दौरान रथ ने लगभग सात सौ गज की दूरी तय की और मध्यान्ह के समय बड़ा बगीचा पहुंचा. यहां भगवान के विश्राम की व्यवस्था की गई. विश्राम के पश्चात रथ पुनः मंदिर की ओर रवाना हुआ. रथ घर पहुंचने पर ठाकुर जी को पुनः पालकी में विराजमान कर शुक्रवार बगीची में स्थापित किया गया.
भगवान को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से यहां रंगीन फव्वारे चलाए गए और ठाकुर जी को शीतल पेय पदार्थ, मिष्ठान्न और विभिन्न प्रकार के फल अर्पित किए गए. इस पूरे आयोजन के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना. मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे. ब्रह्मोत्सव के इस भव्य रथोत्सव ने पूरे वृंदावन को भक्ति और उत्साह के रंग में सराबोर कर दिया.
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