राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, ऑडिट और ट्रस्ट के दोबारा गठन सहित की FIR की सिफारिश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामले में एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने, ट्रस्ट के पुनर्गठन और पिछले वर्षों के चढ़ावे के ऑडिट की सिफारिश की गई है.

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Kuldeep Sharma

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जिन पर आगे सरकार और संबंधित एजेंसियां निर्णय ले सकती हैं.

एसआईटी ने सौंपी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट

मंगलवार को एसआईटी ने अपनी 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी. जांच के दौरान टीम ने करीब 150 लोगों से पूछताछ की और उनके बयानों को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया. सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है. साथ ही मंदिर ट्रस्ट के वर्तमान ढांचे की समीक्षा कर उसे पुनर्गठित करने का सुझाव भी दिया गया है. जांच टीम ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की बात भी कही है.

चढ़ावे के ऑडिट और व्यवस्था सुधार पर जोर

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने पिछले पांच वर्षों में मिले चढ़ावे का विस्तृत ऑडिट कराने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है. टीम ने चढ़ावे के प्रबंधन में संभावित अनियमितताओं को रोकने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए हैं. रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है.


रिकवरी और आगे की कार्रवाई पर नजर

जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों की निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपये की रिकवरी होने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा एक आरोपी के घर से सोना भी बरामद किया गया था. शुरुआती अनुमानों के अनुसार मामले में कथित गड़बड़ी की राशि काफी बड़ी हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार अब इस रिपोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज सकती है. इसके बाद ट्रस्ट से जुड़े मामलों और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा.