88 साल की उम्र में भी समाज सेवा का जज्बा, ‘ब्रूम वॉरियर’ इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिला पद्मश्री सम्मान
चंडीगढ़ के 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को सामाजिक सेवा और स्वच्छता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. उनकी निस्वार्थ सेवा देशभर के लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है.
समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े पद या संसाधनों की जरूरत नहीं होती. इसका जीवंत उदाहरण चंडीगढ़ के इंदरजीत सिंह सिद्धू हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद अपना जीवन स्वच्छता और जनसेवा को समर्पित कर दिया. पंजाब पुलिस में डीआईजी के पद से रिटायर होने के बावजूद उन्होंने आराम का रास्ता नहीं चुना, बल्कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने का अभियान शुरू किया. अब उनके इसी समर्पण और सेवा भावना को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से मान्यता मिली है.
स्वच्छता को बनाया जीवन का मिशन
इंदरजीत सिंह सिद्धू पिछले कई वर्षों से चंडीगढ़ और मोहाली की सड़कों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाते आ रहे हैं. लोग उन्हें प्यार से ‘ब्रूम वॉरियर’ के नाम से जानते हैं. हर सुबह वह अपनी साइकिल-गाड़ी पर झाड़ू और कचरा एकत्र करने का सामान लेकर निकलते हैं और स्वयं सफाई करते हैं. उनका मानना है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है. इसी सोच ने उन्हें हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया है.
राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
गणतंत्र दिवस के अवसर पर उनके नाम की घोषणा पद्मश्री सम्मान के लिए की गई थी. इसके बाद नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं. समारोह में उनकी सेवा यात्रा की भी सराहना की गई.
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समाज को जागरूक करने की अनूठी पहल
सिद्धू का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों को इसके प्रति जागरूक बनाना भी है. वे अक्सर राहगीरों और स्थानीय निवासियों से बातचीत कर उन्हें साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं. उनकी यह पहल धीरे-धीरे एक सामाजिक अभियान का रूप ले चुकी है. कई लोग उनके प्रयासों से प्रभावित होकर अपने आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने लगे हैं. इससे सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है.
सेवा और समर्पण की मिसाल बने सिद्धू
88 वर्ष की उम्र में भी इंदरजीत सिंह सिद्धू की ऊर्जा और प्रतिबद्धता लोगों को हैरान करती है. उन्होंने यह साबित किया है कि समाज सेवा की कोई उम्र नहीं होती. पद्मश्री सम्मान उनके वर्षों के परिश्रम, अनुशासन और जनहित के प्रति समर्पण का प्रतीक है. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं. आज वह केवल चंडीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में नागरिक जिम्मेदारी और स्वच्छता के प्रतीक बन चुके हैं.