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मजार की छत पर सियासी संग्राम, जयपुर में आमने-सामने बीजेपी-कांग्रेस विधायक; 'लैंड जिहाद' से लेकर परमिशन तक क्या है पूरा मामला?

जयपुर में मजार की छत निर्माण को लेकर भाजपा और कांग्रेस विधायक आमने-सामने आ गए. अनुमति, ‘लैंड जिहाद’ और कानून-व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ा, जिसके बाद नगर निगम ने निर्माण की अनुमति रद कर दी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
मजार की छत पर सियासी संग्राम, जयपुर में आमने-सामने बीजेपी-कांग्रेस विधायक; 'लैंड जिहाद' से लेकर परमिशन तक क्या है पूरा मामला?
Courtesy: social media

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक मजार पर छत निर्माण का मामला अचानक सियासी टकराव में बदल गया. चांदपोल सर्किल के पास चल रहे निर्माण कार्य को लेकर भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य और कांग्रेस विधायक अमीन कागजी आमने-सामने आ गए.

दोनों पक्षों के समर्थकों की मौजूदगी से माहौल तनावपूर्ण हो गया. आरोप-प्रत्यारोप, सरकारी अनुमति और कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन को बीच में आना पड़ा. आखिरकार नगर निगम ने पहले दी गई अनुमति को रद कर दिया.

मजार निर्माण पर सियासी टकराव

चांदपोल सर्किल के पास स्थित एक मजार पर मुस्लिम समाज के लोग छत डालकर उसे दरगाह का स्वरूप देने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य को सूचना मिली, जिसके बाद वे समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताते हुए उसे तुरंत रुकवा दिया. देखते ही देखते वहां भीड़ जुट गई और मामला राजनीतिक रंग लेने लगा.

‘लैंड जिहाद’ बनाम सरकारी अनुमति

बालमुकुंदाचार्य ने मजार पर छत डालने को ‘लैंड जिहाद’ करार दिया और नगर निगम व पुलिस अधिकारियों को मौके पर बुलाया. कुछ ही देर में कांग्रेस विधायक अमीन कागजी भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए. कागजी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण के लिए विधायक कोष से 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे और सभी जरूरी सरकारी मंजूरियां ली गई थीं.

समर्थकों के हंगामे से बढ़ा तनाव

दोनों विधायकों की मौजूदगी में समर्थकों के बीच नोकझोंक और हंगामा होने लगा. हालात बिगड़ते देख पुलिस ने मोर्चा संभाला. कुछ समय बाद बालमुकुंदाचार्य वहां से चले गए, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ. अमीन कागजी ने बाद में बालमुकुंदाचार्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया.

नगर निगम ने रद्द की अनुमति

जयपुर नॉर्थ के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बजरंग सिंह शेखावत ने बताया कि नगर निगम ने शुरुआत में छत निर्माण की अनुमति दी थी. हालांकि, नियमों को लेकर आपत्ति सामने आने के बाद बातचीत हुई और निर्माण कार्य रोक दिया गया. बाद में नगर निगम ने जारी परमिट को भी रद्द कर दिया. फिलहाल इलाके में शांति है और पूरे मामले की प्रशासनिक समीक्षा की जा रही है.