जयपुर में पत्रकार कालोनी के पास भीषण हादसा, पैदल चल रहे 14 लोगों पर चढ़ी Audi; 2 की मौत और कई घायल

शुक्रवार रात जयपुर की पत्रकार कॉलोनी में खरबास चौराहे के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ. एक तेज रफ्तार ऑडी कार बेकाबू होकर लोगों के एक ग्रुप से टकरा गई. इस दौरान करीब 14 लोग घायल हो गए जो पैदल चल रहे थे.

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Shilpa Srivastava

जयपुर: शुक्रवार रात जयपुर की पत्रकार कॉलोनी में खरबास चौराहे के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ. एक तेज रफ्तार ऑडी कार बेकाबू होकर लोगों के एक ग्रुप से टकरा गई. इस दौरान करीब 14 लोग घायल हो गए जो पैदल चल रहे थे. इस घटना में दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. इस हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई. 

हादसा होने के बाद आस-पास के लोग घायल पीड़ितों की मदद के लिए पहुंच गए. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को बुलाया. घायल लोगों को तुरंत ही पास के अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज के लिए ले जाया गया. इसमें एसएमएस अस्पताल भी शामिल है. डॉक्टर हादसे में घायल हुए लोगों की जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.

ओवरस्पीडिंग रही हादसे की वजह:

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय ऑडी कार बेहद ही तेज रफ्तार में थी. ओवरस्पीडिंग को भी इस हादसे का एक कारण माना जा रहा है. मामले की जांच अभी भी जारी है. पुलिस ने कार को अपनी हिरासत में ले लिया है. हादसे की वजह की बारीकी से जांच की जा रही है. ऑडी कार का रजिस्ट्रेशन नंबर केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव का है. अधिकारियों ने यह भी बताया कि कार एक ट्रस्ट के नाम पर रजिस्टर्ड है. 

पहले की रिपोर्टों में बताया गया था कि गाड़ी का संबंध दिल्ली रजिस्ट्रेशन से भी हो सकता है, लेकिन इस जानकारी की अभी भी पुष्टि की जा रही है. पुलिस कार से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है और इससे जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है.

भजनलाल शर्मा ने की तुरंत कार्रवाई:

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना पर संज्ञान लिया.मुख्यमंत्री उस समय जोधपुर में थे, लेकिन उन्होंने तुरंत कार्रवाई की. उन्होंने जयपुर शहर के अधिकारियों और अस्पताल अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि सभी घायल लोगों को उचित और समय पर मेडिकल देखभाल मिले.

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को बिना किसी देरी के एसएमएस अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया. उनकी भूमिका घायलों के इलाज की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना था कि दवाओं, डॉक्टरों या सुविधाओं की कोई कमी पीड़ितों को प्रभावित न करे. अस्पताल के अधिकारी लगातार घायल मरीजों की हालत पर नजर रख रहे हैं.