250 रुपये चंदे के लिए युवक की पीट-पीटकर हत्या, पैसे देने से मना करना नहीं हुआ बर्दाश्त

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. सिर्फ 250 रुपए का चंदा नहीं देने पर गांव के कुछ युवकों ने एक मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी. 30 वर्षीय धूलेश्वर मकवाना की मौत से गांव में गुस्सा और दहशत फैल गई है.

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Babli Rautela

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के बस्सी मकवाना गांव में चौंकाने वाली घटना हुई है. गांव में पितृ-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके लिए हर व्यक्ति से ₹250 का चंदा एकत्र करने का निर्णय लिया गया था. मृतक धूलेश्वर पुत्र भाणजी (30 वर्ष) जो एक दिहाड़ी मजदूर था, ने परिजनों के अनुसार चंदा पहले ही दे दिया था. फिर भी कुछ युवक रात करीब 10 बजे उसके घर दोबारा चंदा मांगने पहुंचे. कहासुनी हुई, जिसे वहां मौजूद लोगों ने शांत करवाया और युवक चले गए. लेकिन कुछ देर बाद वही लोग नशे की हालत में लौटे और धूलेश्वर पर बेरहमी से हमला कर दिया.

परिजनों ने बताया कि 5-6 हमलावरों ने लाठियों और डंडों से धूलेश्वर की जमकर पिटाई की. वह तब तक मार खाते रहे जब तक उनकी सांसें थम नहीं गईं. मृतक के भतीजे कमलेश ने बताया, 'हम जब तक पहुंचे, हमलावर फरार हो गए थे. हमने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया.'

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक धूलेश्वर के परिवार में अब तीन छोटे बच्चे और पत्नी रह गए हैं. उनकी बड़ी बेटी 12 साल की है, बेटा 10 साल का और सबसे छोटी बेटी मात्र 7 साल की है. अब इन तीनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मां गुड्डी पर आ गई है. गांव के लोग बताते हैं कि धूलेश्वर मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो रोज मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे. गांव में हर कोई इस बात से हैरान है कि सिर्फ ₹250 की रकम को लेकर एक बेकसूर इंसान की जान ले ली गई.

गांव में तनाव, पुलिस ने दर्ज किया केस

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात काबू में किए. बस्सी थाने की पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत पर सुरेश डामोर, बलराम, छगन और परमेश समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गांव में फिलहाल शांति व्यवस्था बनाए रखी गई है, लेकिन लोग अब भी गुस्से में हैं.