चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के भीतर युवा नेतृत्व को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक हलचल के बीच यूथ कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है. धुरी के युवा नेता शुभम शर्मा ने संगठनात्मक चुनाव में जीत दर्ज करते हुए राज्य इकाई की कमान संभाल ली है. उनकी जीत को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहले से ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है. इस चुनाव ने पार्टी के विभिन्न गुटों की ताकत और संगठन में उनके प्रभाव को भी सामने ला दिया है.
यूथ कांग्रेस चुनाव में शुभम शर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गगनदीप सिंह जलालपुर को 3,883 मतों के अंतर से हराया. यह जीत संगठन के भीतर उनकी मजबूत स्वीकार्यता को दर्शाती है. चुनाव परिणाम सामने आते ही समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला. शर्मा अब राज्य भर में युवा कार्यकर्ताओं को संगठित करने और पार्टी के जनाधार को मजबूत करने की जिम्मेदारी निभाएंगे.
इस चुनाव में विभिन्न कांग्रेस नेताओं के समर्थक अलग अलग उम्मीदवारों के साथ खड़े दिखाई दिए. गगनदीप सिंह जलालपुर को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमे का समर्थन प्राप्त था. वहीं करमवीर ढिल्लों को वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के समर्थक गुट का साथ मिला. चुनाव नतीजों ने संगठन के भीतर मौजूद राजनीतिक समीकरणों की झलक भी दिखाई.
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष पद पर जीत शुभम शर्मा के खाते में गई, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बेटे नवजीत सिंह ने भी यूथ कांग्रेस चुनाव में सफलता हासिल की. इसे युवा संगठन में चन्नी की निरंतर पकड़ के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इससे भविष्य में पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है.
नतीजों के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग स्वयं धुरी पहुंचे और शुभम शर्मा को बधाई दी. उन्होंने अन्य विजयी उम्मीदवारों को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन को गांव और वार्ड स्तर तक मजबूत करना समय की जरूरत है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी के विस्तार में योगदान देने का आह्वान किया.
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंजाब की राजनीति में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे हैं. इसी वजह से कांग्रेस युवा चेहरों को आगे लाकर संगठन में नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है. शुभम शर्मा की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नया नेतृत्व आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए संगठन को किस तरह तैयार करता है.