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India Daily

ईरान के 6.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल का कोई खरीदार नहीं, क्या भारत सस्ते में करेगा डील? जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

अमेरिका से 60 दिनों की छूट मिलने के बाद ईरान भारत समेत एशियाई देशों को कच्चा तेल बेचने की कोशिश में है. हालांकि, पर्याप्त स्टॉक और भविष्य के जोखिमों के कारण भारतीय कंपनियां अभी सावधानी बरत रही हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ईरान के 6.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल का कोई खरीदार नहीं, क्या भारत सस्ते में करेगा डील? जानें क्या कह रहे एक्सपर्ट्स
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता के दौरान ईरान को प्रतिबंधों में 60 दिनों की ढील मिली है. इस छूट का फायदा उठाकर ईरान भारत सहित अन्य एशियाई देशों को फिर से कच्चा तेल बेचने की कोशिशों में जुट गया है. अपनी इसी योजना के तहत तेहरान ने भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तेल कंपनियों से संपर्क साधा है ताकि वह जल्द से जल्द अपने तेल की बिक्री शुरू कर सके.

समुद्र में खड़ा है करोड़ों बैरल तेल

एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का लगभग 6.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस समय समुद्र में जहाजों पर ही जमा है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस तेल में से 80% से ज़्यादा हिस्से के लिए अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है. चूंकि ये जहाज पहले से ही एशियाई समुद्री क्षेत्र के पास मौजूद हैं, इसलिए ईरान के लिए भारत जैसे देशों तक माल पहुंचाना काफी आसान और सुविधाजनक है.

भारतीय रिफाइनरियों का रुख

अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले भारत, ईरान से सबसे ज़्यादा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल था. लेकिन प्रतिबंधों के बाद भारतीय कंपनियों ने वहां से तेल लेना बंद कर दिया था. अब भले ही अस्थाई छूट मिल गई है, फिर भी भारतीय कंपनियां ईरान से तेल खरीदने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही हैं. इसके पीछे कई कारण हैं.

1. सप्लाई की कमी नहीं- भारतीय और अन्य एशियाई तेल कंपनियों के पास अगले कुछ महीनों के लिए पहले से ही पर्याप्त तेल का स्टॉक मौजूद है. बाजार में फिलहाल कच्चे तेल की कोई किल्लत नहीं है.

2. भविष्य का डर- कंपनियों को डर है कि अगर अमेरिका की नीति दोबारा बदल गई, तो भविष्य के सौदे मुश्किल में पड़ सकते हैं.

3. अदरक और अन्य दिक्कतें- बैंकिंग लेन-देन, जहाजों का बीमा और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें अभी भी पूरी तरह सुलझी नहीं हैं. कई बंदरगाह और शिपिंग कंपनियां पुरानी दिक्कतों को देखते हुए ईरानी माल को हाथ लगाने से बच रही हैं.

आगे की राह और भारत को फायदा

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस स्थिति का भारत को फायदा मिल सकता है. चूंकि ईरान को अपना तेल बेचने की जल्दी है, इसलिए भारत सस्ती कीमतों पर मोलभाव कर सकता है. इसके अलावा, तेल के जहाज पास होने के कारण महज दो से तीन दिनों के भीतर डिलीवरी भारत पहुंच सकती है.

फिलहाल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ समय तक चीन ही ईरान का सबसे बड़ा खरीदार बना रहेगा. भारत अभी 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपना रहा है. जब प्रतिबंधों, पेमेंट के तरीकों और वैश्विक राजनीति को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी, तभी भारतीय कंपनियां कोई बड़ा फैसला लेंगी.