चंडीगढ़: सरकारी स्कूल में आमतौर पर बच्चों के बीच शिक्षक या अधिकारी आते हैं, लेकिन फरीदकोट के खारा गांव में बुधवार का नजारा कुछ अलग रहा. पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां सीधे विद्यार्थियों के बीच पहुंचे और कक्षा में उनके साथ बेंच पर बैठ गए. उन्होंने बच्चों से पढ़ाई, खेल और स्कूल की सुविधाओं को लेकर खुलकर बातचीत की. इस दौरान विद्यार्थियों ने भी अपनी जरूरतें और अनुभव उनके सामने रखे. संधवां ने बच्चों को मेहनत और अनुशासन का संदेश दिया.
स्कूल पहुंचने के बाद संधवां ने औपचारिक बातचीत के बजाय विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद किया. वह कक्षा में बच्चों के बीच बेंच पर बैठे और उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा. उन्होंने यह भी जाना कि स्कूल में विद्यार्थियों को किन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है. बच्चों ने अपनी जरूरतों और अनुभवों को उनके साथ साझा किया. इस बातचीत के जरिए स्पीकर ने स्कूल की वास्तविक स्थिति को करीब से समझने की कोशिश की.
संधवां ने विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों में भी भाग लेना जरूरी है. बच्चों से लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करने को कहा गया. उन्होंने विद्यार्थियों को लगन और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. स्पीकर के इस संवाद से बच्चों में उत्साह नजर आया.
विद्यार्थियों से बातचीत के बाद विधानसभा स्पीकर ने स्कूल के अध्यापकों से मुलाकात की. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली. बातचीत के दौरान स्कूल में मौजूद सुविधाओं, जरूरी संसाधनों और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. स्पीकर ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की जरूरतों को समझने और उनकी शिक्षा को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर भी जानकारी हासिल की.
संधवां ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अच्छी बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है. उनके मुताबिक शिक्षा समाज की प्रगति की मजबूत नींव है. बेहतर माहौल मिलने पर बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचानकर भविष्य में आगे बढ़ सकते हैं. उन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की जरूरतों को समझने और उनके लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया.
विद्यार्थियों के बीच बैठकर बातचीत करने का यह तरीका इसलिए भी खास रहा, क्योंकि इससे बच्चों को अपनी बात सीधे रखने का मौका मिला. संधवां ने उनकी बातें सुनकर स्कूल की जरूरतों को समझने का प्रयास किया. ऐसे संवाद से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ सकता है और स्कूल की वास्तविक समस्याओं की जानकारी भी मिलती है. खारा के सरकारी स्कूल में स्पीकर की मौजूदगी ने बच्चों और शिक्षकों के बीच भी उत्साह का माहौल बनाया.