मदर टेरेसा का नाम दुनिया की उन महान हस्तियों में लिया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया. उनकी 116वीं जयंती के मौके पर उन्हें याद किया जा रहा है. इस अवसर पर देश और दुनिया में लोग उनके सेवा कार्यों और मानवता के प्रति उनके समर्पण को नमन कर रहे हैं. मदर टेरेसा ने अपना जीवन ऐसे लोगों की मदद में लगा दिया, जिन्हें समाज में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था. गरीब, बीमार और बेसहारा लोगों के बीच रहकर उन्होंने सेवा का ऐसा उदाहरण पेश किया, जो आज भी लोगों को प्रेरित करता है.
मदर टेरेसा का मानना था कि हर इंसान को प्यार, सम्मान और देखभाल मिलनी चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने अपना जीवन जरूरतमंद लोगों की मदद में लगा दिया. उन्होंने उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की, जिन्हें बीमारी, गरीबी और अकेलेपन के कारण समाज से सहारे की जरूरत थी. उनके सेवा कार्यों में केवल आर्थिक मदद ही शामिल नहीं थी, बल्कि जरूरतमंदों को अपनापन और सम्मान देना भी उनके काम का अहम हिस्सा था. उनकी सादगी और सेवा भावना ने दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा. धीरे धीरे उनका काम एक बड़े सेवा अभियान में बदल गया.
ਮਨੁੱਖਤਾ ਦੀ ਸੇਵਾ ਨੂੰ ਜੀਵਨ ਸਮਰਪਿਤ ਕਰਨ ਵਾਲ਼ੀ, ਮਦਰ ਟੇਰੇਸਾ ਦੀ 116ਵੀਂ ਜਨਮ ਵਰ੍ਹੇਗੰਢ 'ਤੇ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਦਿਲੋਂ ਸਤਿਕਾਰ। ਉਹਨਾਂ ਨੇ ਸਾਰਾ ਜੀਵਨ ਇਹ ਸੁਨੇਹਾ ਦਿੱਤਾ ਕਿ ਹਰ ਮਨੁੱਖ ਪਿਆਰ ਤੇ ਦੇਖਭਾਲ ਦਾ ਹੱਕਦਾਰ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਨਿਭਾਏ ਸੇਵਾ ਕਾਰਜ ਅੱਜ ਵੀ ਦੁਨੀਆ ਭਰ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰੇਰਨਾ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। pic.twitter.com/V5pxQzlAUG
— AAP Punjab (@AAPPunjab) August 26, 2026
मदर टेरेसा ने 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की. इस संस्था का उद्देश्य जरूरतमंद और बेसहारा लोगों की सेवा करना था. समय के साथ संस्था का काम भारत से निकलकर दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचा. संस्था से जुड़ी ननों और स्वयंसेवकों ने गरीबों, बीमारों और बेसहारा लोगों के लिए अलग अलग जगहों पर सेवा कार्य किए. मदर टेरेसा के लिए सेवा केवल किसी व्यक्ति की मदद करने तक सीमित नहीं थी. वह इसे इंसानियत के प्रति जिम्मेदारी मानती थीं.
मदर टेरेसा की सोच का सबसे बड़ा संदेश यही था कि किसी भी इंसान को उसकी स्थिति के आधार पर अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने लोगों को प्रेम, दया और करुणा के साथ जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित किया. उनका मानना था कि किसी व्यक्ति के जीवन में छोटा सा सहारा भी उसके लिए बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है. यही वजह है कि उनके सेवा कार्यों की चर्चा भारत के साथ दुनिया के कई देशों में हुई.
मदर टेरेसा के सेवा कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली. वर्ष 1979 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके मानवीय कार्यों और गरीबों तथा जरूरतमंदों के प्रति उनके समर्पण के लिए दिया गया था. पुरस्कार मिलने के बाद भी उन्होंने अपनी सेवा गतिविधियों को जारी रखा और अपना जीवन उसी उद्देश्य के लिए समर्पित रखा. इसके अलावा भारत सरकार ने भी उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल भारत रत्न से सम्मानित किया.