पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम, फीस बढ़ोतरी पर 5% की सीमा तय
पंजाब में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल अब मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. नए विधेयक में सामान्य बढ़ोतरी की सीमा पांच प्रतिशत तय की गई है और अतिरिक्त वसूली लौटाने का प्रावधान भी है.
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया है. पंजाब विनियमन शुल्क गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान संशोधन विधेयक-2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. नए नियमों के तहत स्कूल सामान्य परिस्थितियों में एक शैक्षणिक सत्र में पिछली फीस से पांच प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे. इससे अधिक वृद्धि के लिए नियामक संस्था की मंजूरी जरूरी होगी. सरकार ने अभिभावकों को राहत देने के साथ स्कूलों की जवाबदेही बढ़ाने के कई प्रावधान भी जोड़े हैं.
नए प्रावधान के अनुसार स्कूल सामान्य स्थिति में एक शैक्षणिक वर्ष के दौरान पिछली फीस की तुलना में अधिकतम पांच प्रतिशत वृद्धि कर सकेंगे. यदि स्कूल को इससे ज्यादा फीस बढ़ानी है, तो उसे सत्र शुरू होने से कम से कम 180 दिन पहले जिला नियामक संस्था के सामने प्रस्ताव रखना होगा. लिखित मंजूरी मिलने तक नई फीस लागू नहीं की जा सकेगी. आवेदन पर जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद संस्था को 90 दिन के भीतर निर्णय करना होगा.
फीस में अब कई तरह के शुल्क शामिल
संशोधन में फीस की परिभाषा को भी व्यापक किया गया है. ट्यूशन, विकास, वार्षिक और गतिविधि शुल्क के अलावा स्मार्ट क्लास, तकनीकी, परिवहन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और परीक्षा शुल्क भी इसमें शामिल होंगे. स्कूल या उससे जुड़ी संस्था की ओर से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से लिया जाने वाला अन्य अनिवार्य आर्थिक योगदान भी फीस माना जाएगा. वास्तविक रूप से वापस की जाने वाली सुरक्षा राशि को इससे अलग रखा गया है.
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तीन साल की फीस वृद्धि पर भी नजर
विधेयक में 36 महीने की अवधि के दौरान फीस वृद्धि की कुल सीमा को भी ध्यान में रखा गया है. यदि तीन वर्षों में फीस शुरुआती शैक्षणिक वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है, तो तय सीमा से अधिक वसूली गई राशि संबंधित विद्यार्थियों या अभिभावकों को लौटानी होगी. यह रकम विधेयक लागू होने की अधिसूचना के 90 दिन के भीतर वापस करनी होगी. एक या दो वर्ष पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए क्रमश: पांच और 10 प्रतिशत की सीमा तय होगी.
वर्दी और किताबों की खरीद में भी राहत
स्कूल अब अभिभावकों को किसी खास दुकान से वर्दी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे. निर्धारित रंग, डिजाइन और माप के अनुसार वर्दी किसी भी विक्रेता से खरीदी जा सकेगी. किताबों, कार्यपुस्तिकाओं और अध्ययन सामग्री के मामले में भी स्कूलों को कम से कम तीन प्रकाशकों या विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक करनी होगी. किसी एक दुकान या प्रकाशक से सामान खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाया जा सकेगा.
नियम तोड़े तो रोजाना 10 हजार रुपये तक जुर्माना
फीस वापसी के आदेश का 30 दिन में पालन नहीं करने पर स्कूल पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकेगा. जुर्माना और वापसी की राशि नहीं चुकाने पर मान्यता या संबद्धता वापस लेने की कार्रवाई भी संभव होगी. नियामक संस्था स्वत: संज्ञान लेकर फोरेंसिक ऑडिट करा सकेगी और रिकॉर्ड मांग सकेगी. आदेश के खिलाफ 45 दिन में शिक्षा विभाग के सचिव के सामने अपील की जा सकेगी. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसे अभिभावकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया.