चंडीगढ़: पंजाब में ‘आम आदमी क्लीनिक’ योजना अब जेलों की ऊंची दीवारों के पार भी स्वास्थ्य की नई रोशनी फैलाने जा रही है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पहल से राज्य की 10 केंद्रीय जेलों में मुफ्त इलाज और दवाओं की सुविधा शुरू होगी.
यह कदम न केवल कैदियों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में है, बल्कि सरकार के उस वादे का प्रतीक भी है जिसमें हर नागरिक को समान और सुलभ स्वास्थ्य सेवा का अधिकार देने की बात कही गई है.
मान सरकार ने जेलों के भीतर आम आदमी क्लीनिक स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. स्वास्थ्य विभाग ने सभी 10 केंद्रीय जेलों में जगह चिन्हित करनी शुरू कर दी है. यहाँ कैदियों को 107 प्रकार की मुफ्त दवाएँ और 47 प्रकार के मुफ्त टेस्ट मिलेंगे. यह पहल जेलों में मौजूद स्वास्थ्य चुनौतियों, खासकर संक्रामक बीमारियों से निपटने में एक ठोस कदम साबित होगी.
पंजाब की जेलों में भीड़भाड़ और खराब स्वच्छता की स्थिति के कारण हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं. ऐसे में AACs की स्थापना से इन बीमारियों के नियंत्रण में बड़ी मदद मिलेगी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल इलाज तक पहुँच बढ़ाएगी बल्कि कैदियों में स्वास्थ्य जागरूकता भी लाएगी, जिससे संक्रमण का खतरा घटेगा.
पंजाब में फिलहाल 881 आम आदमी क्लीनिक सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं. सरकार जल्द ही 236 नए क्लीनिक खोलने जा रही है, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं. इस विस्तार के बाद राज्य में कुल 1,117 क्लीनिक होंगे. इन क्लीनिकों ने अब तक 4.20 करोड़ से अधिक मरीजों का इलाज किया है और हर दिन करीब 73,000 लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं.
जहाँ पहले लोगों को मामूली इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब वे अपने मोहल्ले में ही मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पा रहे हैं. खासकर ग्रामीण और गरीब तबके को इसका सीधा लाभ मिला है. इस योजना ने लाखों परिवारों को महंगे इलाज के बोझ से राहत दी है और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर लोगों का भरोसा बढ़ाया है.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अच्छी सेहत अब केवल नारा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता है. जेलों में क्लीनिक खोलने का यह कदम उस सोच को दर्शाता है जिसमें हर व्यक्ति—चाहे समाज में हो या जेल में—मानवाधिकारों और स्वास्थ्य सेवाओं का समान हकदार है. यह कदम पंजाब को न केवल एक सशक्त स्वास्थ्य मॉडल बना रहा है, बल्कि एक संवेदनशील और मानवीय प्रशासन की दिशा में भी अग्रसर कर रहा है.