'हाईकोर्ट ने कई पहलुओं पर नहीं किया विचार', बकाया DA पर पंजाब सरकार की नई दलील
पंजाब में कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद सरकार ने कानूनी समीक्षा शुरू कर दी है. वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार संवैधानिक दायित्व निभाएगी, लेकिन फैसले के सभी पहलुओं का परीक्षण होगा.
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों और पेंशनर्स का बकाया महंगाई भत्ता (DA) देने के आदेश के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासन में हलचल तेज हो गई है. अदालत ने भुगतान में देरी होने पर ब्याज देने और विज्ञापन खर्च रोकने जैसी सख्त टिप्पणी भी की है. इस बीच पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार अदालत के आदेश का सम्मान करती है, लेकिन निर्णय के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी.
वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के वैध बकाए का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि उनका कहना है कि सुनवाई के दौरान रखे गए कई महत्वपूर्ण पक्ष अंतिम फैसले में पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं हुए. इसी वजह से सरकार की कानूनी टीम पूरे आदेश का अध्ययन कर रही है. समीक्षा पूरी होने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी.
बकाया DA को लेकर क्या है पूरा विवाद?
चीमा ने बताया कि छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2016 में तैयार हुई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे लागू नहीं किया. बाद में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले रिपोर्ट लागू की गई, जबकि जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक का DA बकाया रोक दिया गया. इसके कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स का लगभग 14,191 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित हो गया.
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सरकार ने अपने भुगतान का दिया ब्यौरा
वित्तमंत्री के अनुसार सरकार चरणबद्ध तरीके से भुगतान कर रही है. पहले 85 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स और फिर 75 वर्ष से ऊपर के लाभार्थियों का बकाया जारी किया गया. अप्रैल 2026 से कर्मचारियों और अन्य पेंशनर्स को भी भुगतान शुरू किया गया. सरकार का दावा है कि अब तक लगभग 6,000 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और भुगतान की योजना पहले ही अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी थी.
कोर्ट के आदेश से बढ़ी वित्तीय चुनौती
डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज करते हुए 15 दिन के भीतर पूरा बकाया चुकाने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समयसीमा का पालन नहीं होने पर छह प्रतिशत ब्याज देना होगा. सरकारी सूत्रों का कहना है कि ब्याज समेत कुल वित्तीय देनदारी लगभग 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो राज्य के लिए बड़ी चुनौती है.
अब आगे क्या होगा?
सरकार फिलहाल 76 पन्नों के विस्तृत फैसले का कानूनी परीक्षण करा रही है. वित्तमंत्री ने कहा कि अंतिम निर्णय विशेषज्ञों की राय मिलने के बाद लिया जाएगा. दूसरी ओर कर्मचारी संगठन अदालत के आदेश को अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं. आने वाले दिनों में यह मामला पंजाब की राजनीति और वित्तीय प्रबंधन दोनों के लिए अहम मुद्दा बना रहेगा.