पंजाब कांग्रेस में फिर घमासान, ‘गो बैक’ नारों से लेकर मंच पर भिड़ंत तक मचा बवाल

पंजाब कांग्रेस का 10 दिवसीय ‘हर बूथ मजबूत’ अभियान गुटबाजी, नारेबाजी और विवादों के बीच खत्म हुआ. 18 जिलों के दौरे के दौरान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक एकता पर सवाल उठे.

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Kanhaiya Kumar Jha

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस का ‘हर बूथ मजबूत’ अभियान शनिवार को लुधियाना में समाप्त हो गया, लेकिन अभियान ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को और उजागर कर दिया. प्रदेश प्रभारी और AICC महासचिव भूपेश बघेल ने 10 दिनों में 18 जिलों का दौरा कर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया. इस दौरान कई जगह विरोध, नारेबाजी और नेताओं के समर्थकों के बीच विवाद सामने आए. लुधियाना में अभियान का समापन भी गुटीय टकराव से अछूता नहीं रहा.

अभियान का आखिरी कार्यक्रम पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के लोकसभा क्षेत्र लुधियाना में खन्ना में हुआ. यहां पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के समर्थकों ने नारे लगाए. इसके बाद वड़िंग ने आरोप लगाया कि इन समर्थकों को RSS का समर्थन हासिल है. कार्यक्रम के दौरान विवाद ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया.

कई जिलों में दिखी गुटबाजी

मालेरकोटला में भी कांग्रेस के दो गुटों के बीच कथित तौर पर मंच पर विवाद हुआ. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों पक्षों को अलग करने के लिए लाठियां चलानी पड़ीं. खन्ना में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में नारे लगाए. नारे रोकने की कोशिश के बाद उनके बैठक से बाहर जाने की बात सामने आई.


पटियाला से मानसा तक विरोध

बघेल के 10 दिवसीय दौरे के दौरान पटियाला, संगरूर, फिरोजपुर, बठिंडा, मुक्तसर और मानसा में भी विरोध और मतभेद की घटनाएं सामने आईं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसे घटनाक्रम से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने का उद्देश्य कमजोर पड़ता है. उनके मुताबिक, मतभेद रखने वाले नेताओं को सार्वजनिक मंच पर टकराव के बजाय हाईकमान के सामने अपनी बात रखनी चाहिए.

अनुशासन पर बघेल का सख्त संदेश

भूपेश बघेल ने पूरे अभियान के दौरान पार्टी कार्यक्रमों में अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में व्यवधान डालने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी. बघेल ने संगठन के भीतर काम कर रहे ‘स्लीपर सेल’ और ‘आंतरिक नुकसान पहुंचाने वालों’ को सामने लाने की भी बात कही. उनका संदेश साफ था कि चुनावी तैयारी के बीच पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं करेगी.

वड़िंग और चन्नी के बीच मतभेद

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की समस्या नई नहीं है. 1 जुलाई को कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा था और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया था. इसके बाद चन्नी के नेतृत्व वाले एक वर्ग ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया और उन्हें हटाने की मांग की. 2027 चुनाव से पहले यही मतभेद पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं.