पंजाब विधानसभा सत्र शुरू, कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर बिल सबसे बड़ा मुद्दा
आज सदन में पंजाब खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड की साल 2020-21 और 2021-22 की वार्षिक लेखा रिपोर्ट पेश की जाएगी. इसके अलावा पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा होगी. सरकार इस बिल पर तत्काल विचार करने और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखेगी.
पंजाब: पंजाब विधानसभा में मानसून सत्र का पांचवां दिन शुरू हो गया है. आज भी सदन में हंगामा होने की संभावना बनी हुई है. विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियां सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगी.
पंजाब विधानसभा सत्र शुरू
आज सदन में पंजाब खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड की साल 2020-21 और 2021-22 की वार्षिक लेखा रिपोर्ट पेश की जाएगी. इसके अलावा पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा होगी. सरकार इस बिल पर तत्काल विचार करने और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखेगी.
कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर बिल सबसे बड़ा मुद्दा
यह मानसून सत्र मौजूदा सरकार के कार्यकाल का अंतिम विधानसभा सत्र माना जा रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. ऐसे में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस ने हाल ही में अपना संगठन मजबूत किया है और सरकार पर लगातार हमला बोल रही है.
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कांग्रेस विधायक पिछले तीन दिनों से काले पटके पहनकर विधानसभा पहुंच रहे हैं. वे सदन के बाहर भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. विपक्ष सरकार पर कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीं आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार पर हमलावर नजर आ रही है.
सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही दोनों तरफ से तीखे आरोप-प्रत्यारोप की उम्मीद है. सरकार अपनी उपलब्धियों को बताने की कोशिश करेगी तो विपक्ष कमियों को उजागर करेगा. आम लोगों से जुड़े मुद्दे जैसे विकास कार्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं चर्चा का केंद्र रह सकते हैं.
इस सत्र में महत्वपूर्ण बिलों पर बहस होगी. कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर संशोधन बिल से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा होने वाली है. विपक्ष इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जता सकता है. सरकार इसे जरूरी बताते हुए पास कराने की कोशिश करेगी.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आने वाले चुनावों को देखते हुए दोनों पक्ष अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं. विपक्ष सरकार की नाकामियों को सामने लाने की कोशिश में है तो सत्ताधारी दल अपने कामकाज का बचाव करेगा. पंजाब की राजनीति में इस समय तनाव साफ दिख रहा है.