उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अब स्कूल-कॉलेजों में भी अभियान, तस्करों पर शिकंजे के साथ युवाओं की होगी काउंसलिंग

उत्तराखंड में नशे के खिलाफ अभियान को स्कूल-कॉलेजों तक ले जाने की तैयारी है. सरकार जागरूकता कार्यक्रमों, काउंसलिंग और एंटी-ड्रग सेल के जरिए युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर दे रही है.

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Kuldeep Sharma

उत्तराखंड में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम अब युवाओं और शिक्षण संस्थानों पर ज्यादा केंद्रित की जा रही है. सरकार के मुताबिक स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इसके साथ ही नशे की तस्करी रोकने, प्रभावित युवाओं के पुनर्वास और समय पर काउंसलिंग की व्यवस्था पर भी जोर है.

स्कूल-कॉलेजों में चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ अभियान के तहत शिक्षण संस्थानों को अभियान का अहम केंद्र बनाया जा रहा है. स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को नशीले पदार्थों के नुकसान के बारे में जानकारी देने के साथ जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने की योजना है. राज्य में पहले से ही कई संस्थानों में एंटी-ड्रग सेल, पोस्टर प्रतियोगिता, रैलियां और अन्य कार्यक्रम किए जा रहे हैं.

तस्करी की सूचना देने वालों को इनाम

सरकार की रणनीति केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है. एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है. दी गई जानकारी के मुताबिक, तस्करी की सटीक सूचना देने वाले लोगों के लिए इनाम की व्यवस्था की गई है, जिसमें 20 हजार से लेकर 2.40 लाख रुपये तक की राशि निर्धारित है. प्रशासन ने लोगों से नशे से जुड़ी जानकारी संबंधित अधिकारियों या 1933 हेल्पलाइन तक पहुंचाने की अपील की है.


कई जिलों में कार्रवाई, नशीली दवाएं बरामद

नशे के अवैध कारोबार पर कार्रवाई के दौरान देहरादून के सेलाकुई, हरिद्वार के भगवानपुर और रुड़की, पौड़ी के कोटद्वार तथा पिथौरागढ़ में अवैध गतिविधियों से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया गया है. हाल की कार्रवाइयों में नकली दवाओं के नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी की गिरफ्तारी और मेडिकल स्टोरों से नशीले इंजेक्शन, प्रतिबंधित दवाएं तथा कोडीन युक्त सिरप बरामद करने की जानकारी दी गई है.

युवाओं की निगरानी और काउंसलिंग पर जोर

अभियान में नए छात्रों और पीजी-हॉस्टल में रहने वाले युवाओं पर भी नजर रखने की बात कही गई है, ताकि नशे की ओर बढ़ते कदमों को समय रहते पहचाना जा सके. सरकार के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. नशे की समस्या से जूझ रहे युवाओं को पुनर्वास के जरिए सामान्य जीवन में लौटाने पर भी जोर है. हालिया राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी शिक्षण संस्थानों में काउंसलिंग और नशामुक्त वातावरण बनाने को महत्वपूर्ण बताया गया था.