न प्रस्ताव भेजा न मिला केंद्र से फंड, चंडीगढ़ में न्यायिक ढांचे के विस्तार पर उठे सवाल; संसद में भड़का मुद्दा
लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने न्यायिक ढांचे के विस्तार के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा और इस कारण केंद्र से कोई फंड भी नहीं मिला.
चंडीगढ़: चंडीगढ़ में अदालतों के बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास के लिए न तो कोई प्रस्ताव भेजा है और न ही इस मद में केंद्र से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त की है. इस खुलासे के बाद शहर में न्यायिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
यह मामला उस समय और महत्वपूर्ण हो गया जब हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था. इसके बावजूद न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कोई ठोस पहल सामने नहीं आने से सवाल उठ रहे हैं.
केंद्र सरकार का क्या है कहना?
लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए कोर्ट हॉल, न्यायाधीशों के आवास, वकीलों के चैंबर और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है. केंद्र सरकार केवल केंद्र प्रायोजित योजना के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है.
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सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 85 न्यायाधीशों के स्वीकृत पद हैं, जबकि वहां केवल 69 कोर्ट हॉल उपलब्ध हैं. हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए 64 सरकारी आवास और 131 अधिवक्ता चैंबर मौजूद हैं.
चंडीगढ़ की जिला अदालत में क्या-क्या हैं सुविधाएं?
वहीं चंडीगढ़ की जिला अदालत में 30 न्यायिक अधिकारियों के लिए 31 कोर्ट हॉल, 29 आवास और 440 अधिवक्ता चैंबर उपलब्ध हैं. पिछले पांच वर्षों में हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए तीन नए आवास बनाए गए हैं, लेकिन जिला और अधीनस्थ अदालतों में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत कोई नया आधारभूत ढांचा विकसित नहीं किया गया है.
सांसद मनीष तिवारी ने सरकार से यह भी पूछा था कि न्यायिक ढांचे के विकास के लिए क्या योजनाएं बनाई गई हैं और केंद्र से अब तक कितना फंड मिला है. सरकार के जवाब से स्पष्ट हुआ कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं भेजे जाने के कारण इस दिशा में केंद्र से वित्तीय सहायता भी नहीं मिल सकी.