नई दिल्ली: पंजाब की राजनीति के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी सेहत है. उन्हें चलने में परेशानी के चलते फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनके घुटनों का ऑपरेशन किया जाना है. हालांकि खुद अमरिंदर सिंह ने साफ किया है कि उनकी हालत स्थिर है और घबराने की कोई बात नहीं है. इस बीच उनके हालिया राजनीतिक बयानों की भी फिर से चर्चा शुरू हो गई है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह को बीते दिनों चलने में दिक्कत महसूस हो रही थी. इसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, उनके घुटनों से जुड़ा ऑपरेशन किया जाएगा. अमरिंदर सिंह ने खुद कहा है कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और यह सिर्फ उम्र से जुड़ी समस्या का इलाज है. उन्होंने अपने समर्थकों से चिंता न करने की अपील भी की है.
अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद राजनीतिक हलकों में चिंता जताई गई. लेकिन अमरिंदर सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सेहत को लेकर अफवाहें बेवजह हैं. उन्होंने कहा कि वह नियमित रूप से डॉक्टरों की निगरानी में हैं और जल्द ही सामान्य गतिविधियों में लौट आएंगे. उनके करीबी नेताओं ने भी बताया कि ऑपरेशन के बाद उन्हें कुछ दिनों के आराम की सलाह दी गई है.
दिसंबर महीने में कैप्टन अमरिंदर सिंह उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने बीजेपी के कामकाज पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि बीजेपी का रवैया सख्त है और पार्टी में फैसले दिल्ली से होते हैं. इसके उलट उन्होंने कांग्रेस को ज्यादा लचीली और सलाह-मशविरे वाली पार्टी बताया था. उनके इस बयान के बाद अटकलें तेज हो गई थीं कि वह बीजेपी छोड़ सकते हैं.
जब उनसे कांग्रेस में लौटने की संभावना पर सवाल किया गया, तो अमरिंदर सिंह ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा था कि जिस तरीके से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, उससे वह आज भी आहत हैं. इसी वजह से कांग्रेस में शामिल होने का कोई सवाल नहीं उठता. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास छह दशक का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन बीजेपी में जमीनी नेताओं की राय को अहमियत नहीं दी जाती.
बीजेपी पर आलोचना के बावजूद अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी का पंजाब के प्रति विशेष लगाव है और वह राज्य के लिए गंभीरता से काम करना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर पंजाब में बीजेपी को मजबूत होना है, तो उसे शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करना चाहिए. यह बयान भी राजनीतिक चर्चाओं का बड़ा विषय बना था.