'पंजाब के पानी की एक बूंद भी नहीं देंगे.', SYL नहर विवाद पर CM भगवंत मान का हरियाणा के सीएम को दो टूक संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि सतही जल की कमी के कारण पंजाब में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है.राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉक ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ की श्रेणी में आ चुके हैं और भूमिगत जल निकासी की दर देश में सबसे अधिक है.
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद को लेकर पंजाब का पक्ष बेहद स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में रखा है. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब सरकार जल विवाद पर राज्य के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पंजाब के हिस्से के पानी की एक बूंद भी किसी अन्य राज्य को देने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब बड़ा भाई जरूर है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि राज्य अपने ही संसाधनों की अनदेखी करे.उन्होंने कहा कि पंजाब हरियाणा के साथ वैर-विरोध नहीं चाहता और इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान आपसी सहमति से निकालना चाहता है.
एसवाईएल नहर को भावनात्मक मुद्दा बताते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि इसे जबरन लागू किया गया, तो पंजाब में कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.उन्होंने यह भी साफ किया कि वर्तमान परिस्थितियों में एसवाईएल नहर के लिए पंजाब के पास भूमि तक उपलब्ध नहीं है. पंजाब के जल संकट पर गंभीर चिंता जताते हुए भगवंत मान ने कहा कि तीन नदियों के कुल 34.34 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी में से पंजाब को मात्र 14.22 एमएएफ यानी लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मिला है, जबकि शेष 60 प्रतिशत पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को जाता है, जबकि इन राज्यों से कोई भी नदी होकर नहीं बहती.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सतही जल की कमी के कारण पंजाब में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है.राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉक ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ की श्रेणी में आ चुके हैं और भूमिगत जल निकासी की दर देश में सबसे अधिक है. भाई घनैया जी की सेवा भावना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब अपनी जरूरतों को दरकिनार कर वर्षों से गैर-रिपेरियन राज्यों की जल आवश्यकताओं को पूरा करता रहा है.उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब अपने हिस्से का पानी साझा करता है, लेकिन बाढ़ से होने वाला नुकसान अकेले पंजाब को ही झेलना पड़ता है.
पावन गुरबाणी की पंक्ति ‘पवण गुरु पाणी पिता माता धरत महत॥’ का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण गुरु साहिबान की शिक्षाओं के अनुरूप राज्य सरकार की प्राथमिकता है. मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के इतिहास में यह पहली बार है जब दोनों राज्यों की सरकारें इस मुद्दे के समाधान को लेकर गंभीर और सकारात्मक चर्चा कर रही हैं.उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत या हार का सवाल नहीं, बल्कि पंजाब और पंजाबियों की भावनाओं और हितों का विषय है.
इस दिशा में आगे बढ़ते हुए भगवंत सिंह मान ने दोनों राज्यों के अधिकारियों का एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित करने का सुझाव दिया, जो नियमित बैठकें कर विवाद का स्थायी और सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल सके.उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे दोनों राज्यों में विकास, प्रगति और समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा. इस बैठक में जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत, जल संसाधन सचिव कृष्ण कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.