सहकारिता के गलियारों से सत्ता के शिखर तक, जानिए अजीत पवार का राजनीतिक सफर
22 जुलाई 1959 को जन्मे अजीत पवार ने सहकारी आंदोलन से राजनीति में पहचान बनाई, बारामती से लगातार विधायक रहे, छह बार उपमुख्यमंत्री बने और विवादों व राजनीतिक फैसलों के बावजूद महाराष्ट्र की सत्ता में निर्णायक भूमिका निभाई.
28 जनवरी 2026 को बारामती में एक दुखद विमान हादसे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के 44 साल लंबे राजनीतिक सफर पर विराम लगा दिया. 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर में जन्मे अजीत पवार का सार्वजनिक जीवन 1982 में एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुआ था. यद्यपि उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में राजनीति सीखी, लेकिन अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और कार्यक्षमता के दम पर उन्होंने अपनी अलग पहचान 'दादा' के रूप में स्थापित की.
पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष
अजीत पवार की असली ताकत सहकारी क्षेत्र था. 1991 में वे पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और अगले 16 वर्षों तक इस पद पर रहे. उनके नेतृत्व में बैंक का टर्नओवर 558 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,714 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. 1991 में ही वे पहली बार बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन जल्द ही अपने चाचा के लिए सीट खाली कर राज्य की राजनीति में लौट आए. इसके बाद वे बारामती विधानसभा से लगातार सात बार विधायक चुने गए.
उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड
अजीत पवार के नाम महाराष्ट्र में सबसे अधिक छह बार उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने वित्त, योजना, ऊर्जा और जल संसाधन जैसे भारी-भरकम विभागों को संभाला और प्रशासन पर अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने गए. उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा; विशेषकर 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोप, जिनमें लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें क्लीन चिट मिली.
कुशल राजनीतिज्ञ
उनका राजनीतिक कौशल 2019 में दिखा जब उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ मिलकर सुबह-सुबह शपथ लेकर सबको चौंका दिया था. हालांकि, 2023 में उन्होंने सबसे बड़ा साहसी कदम उठाया और अपने चाचा से अलग होकर एनसीपी के बहुमत विधायकों के साथ महायुति सरकार में शामिल हो गए. अंततः चुनाव आयोग ने उनके नेतृत्व वाले गुट को ही असली 'एनसीपी' के रूप में मान्यता दी.