अमेरिका के खिलाफ एकजुट हुआ मिडिल ईस्ट? ईरान पर हमले के लिए सऊदी अरब नहीं देगा अपना एयरस्पेस
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. अमेरिकी जहाज और युद्धपोत मीडिल ईस्ट में इंटर भी कर चुका है. लेकिन इसी बीच सऊदी अरब ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है.
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. अमेरिकी जंगी जहाजों और युद्धपोतों के मिडिल ईस्ट पहुंचने के बाद यह आशंका तेज हो गई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी समय ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. हालांकि इसी बीच सऊदी अरब ने अमेरिका बड़ा झटका दिया है.
सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या जमीन के इस्तेमाल नहीं करने देंगे. सऊदी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी सैन्य मौजूदगी मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ रही है और क्षेत्रीय देशों पर दबाव महसूस किया जा रहा है.
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने क्या कहा?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच फोन पर बातचीत हुई. जिसके बाद उन्होंने अपने इस फैसले के बारे में बताते हुए मीडिया को अपडेट दिया कि मंगलवार की देर रात उनकी बात हुई है. क्राउन प्रिंस ने ईरान की संप्रभुता के सम्मान को लेकर सऊदी अरब के रुख को दोहराया और स्पष्ट किया कि सऊदी भूमि या हवाई क्षेत्र को किसी भी तरह के हमले के लिए लॉन्चपैड नहीं बनने दिया जाएगा. सऊदी अरब ने इस बातचीत के दौरान यह भी संकेत दिया कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देता है. सऊदी नेतृत्व का मानना है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से न केवल ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ेगी, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ेगा.
यूएई पहले ही खींच चुका है अपना कदम
गौरतलब है कि सऊदी अरब से पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी इसी तरह का रुख अपना चुका है. यूएई के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बयान जारी किया था. इस बयान में कहा गया कि यूएई अपने हवाई क्षेत्र, जमीन या समुद्र का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा. यूएई ने भी तटस्थता और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी. ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. अमेरिकी नौसेना का अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में पहुंच चुका है. इन युद्धपोतों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनों से हटाकर यहां तैनात किया गया है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं. हालांकि अब सऊदी अरब और यूएई जैसे अहम देशों के इनकार के बाद अमेरिका के लिए रणनीतिक विकल्प सीमित होते दिख रहे हैं.