चंडीगढ़ और जीरकपुर के रियल एस्टेट बाजार से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. लंबे समय से अपने फ्लैट के कब्जे का इंतजार कर रहे एक खरीदार को आखिरकार राहत मिल गई है. पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने देरी से कब्जा देने के मामले में बिल्डर के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. रेरा के फैसले ने उन हजारों घर खरीदारों को भी उम्मीद दी है जो समय पर कब्जा न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं. प्राधिकरण ने साफ किया है कि तय समय सीमा का पालन न करने वाले बिल्डरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और खरीदारों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
मामला जीरकपुर स्थित ‘द हर्मिटेज पार्क फेज-2’ परियोजना का है. शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार ने रेरा में याचिका दायर कर बताया कि उन्होंने टावर-5ए की 11वीं मंजिल पर 4-बीएचके फ्लैट बुक कराया था. फ्लैट की कुल कीमत 74.50 लाख रुपये तय हुई थी और उन्होंने 39.11 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया था. समझौते के अनुसार मार्च 2023 तक कब्जा मिलना था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी फ्लैट नहीं सौंपा गया.
सुनवाई के दौरान रेरा ने पाया कि बिल्डर कंपनी समय पर निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सकी. इसके अलावा आवश्यक आक्यूपेशन और कम्प्लीशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं किए गए थे. प्राधिकरण ने कहा कि रेरा अधिनियम की धारा 18 के तहत खरीदार को देरी की अवधि के लिए ब्याज प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है. इसी आधार पर बिल्डर को जिम्मेदार माना गया.
रेरा चेयरमैन आर.के. गोयल की पीठ ने बिल्डर कंपनी पैराडाइम बिजनेस वेंचर को निर्देश दिया कि वह खरीदार को देरी के लिए 10.80 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करे. प्राधिकरण ने 31 मई 2026 तक देय ब्याज की राशि 13,37,714 रुपये निर्धारित की है. इसके अलावा 1 जून 2026 से वास्तविक कब्जा मिलने तक 35,203 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा.
रेरा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगर 90 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो राशि की वसूली भू-राजस्व बकाया की तरह की जाएगी. इसके लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कार्रवाई होगी. साथ ही बिल्डर को पहले खरीदार के ब्याज का भुगतान या समायोजन करना होगा, उसके बाद ही किसी बकाया राशि की मांग की जा सकेगी. इस फैसले को रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.